अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना के लिए महिलाओं ने सोमवार को हरतालिका तीज पर निर्जला व्रत रखा। सोलहों शृंगार कर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की।
बड़ी संख्या में महिलाओं ने घरों में प्रतिमा स्थापित कर पूजन किया, वहीं शिव मंदिरों में भी व्रती महिलाओं की भीड़ रही। मान्यता है कि माता पार्वती ने भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कठिन तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था।
इसके बाद दोनों का विवाह हुआ। इसी मान्यता के तहत कुंवारी कन्याएं मनवांछित वर और विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना से हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं। महिलाओं ने आधी रात के बाद सरगही कर व्रत का संकल्प लिया। सुबह से ही पूजा-अर्चना की तैयारियां शुरू हो गईं। दोपहर बाद स्नान-ध्यान और सोलहों शृंगार के बाद महिलाएं शिव मंदिरों में पहुंचीं और शिव-पार्वती की पूजा कर तीज की कथा सुनी। घरों में भी महिलाओं ने मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश की प्रतिमाएं बनाईं।
पुरोहितों के माध्यम से विधि-विधान से पूजन कराया गया। भगवान शिव और माता पार्वती को पकवानों का भोग लगाया गया और शृंगार सामग्री अर्पित की गई।