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अब संक्रामक बीमारियों ने घेरा

Sun, 28 Aug 2016 01:15 AM IST
chandauli
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बाढ़ चौकी पर फार्मासिस्ट से दवा लेते ग्रामीण। - फोटो : chandauli
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बारिश और बाढ़ के बाद बाढ़ प्रभावित इलाकों में संक्रामक बीमारियों ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। उन इलाकों में स्थिति सबसे भयावह है जहां बाढ़ का पानी उतर रहा है। स्वास्थ्य महकमे की तैयारियों पर नजर डालें तो ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव को पिछले वर्ष जो धन आवंटित हुए थे वही खर्च नहीं हो सके हैं। कहीं कहीं बाढ़ चौकी पर शनिवार को दवाएं दी गईं। इनमें चहनियां के चकरा गांव में बनी बाढ़ चौकी पर ग्रामीणों ने पहुंच कर दवाएं लीं। उधर, जिला प्रशासन के कड़े रुख के बाद भी व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही।
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जनपद में 734 ग्राम पंचायतें हैं। इसमें 200 से अधिक ग्राम पंचायतें इन दिनों बाढ़ का दंश झेल रही हैं। पिछली बार नया परिसीमन लागू होने से पूर्व 620 ग्राम पंचायतों को दस-दस हजार रुपये ग्राम प्रधान व एएनएम के संयुक्त खाते में जारी हुए थे। उक्त धनराशि से ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव व सफाई संबंधित कार्य किए जाने थे, लेकिन स्वास्थ्य महकमे से प्राप्त उक्त धनराशि को अब तक खर्च नहीं किया गया। इसी का परिणाम रहा कि कई गांवों में लोग डायरिया, मलेरिया, वायरल फीवर समेत कई खतरनाक संक्रामक रोगों की जद में आ रहे हैं। ऐसे में बाढ़ का पानी उतर गया तो संक्रामक रोगों से पार पाना मुश्किल होगा। इसी को लेकर ग्रामीण दहशत में हैं। लेकिन उनकी परेशानी किसी की समझ में नहीं आ रही है। ग्रामीणों का कहना है जब अभी यह हाल है तो आगे क्या होगा, यह भगवान भरोसे है। स्वास्थ्य महकमें को चाहिए कि समय रहते अभी से तैयार रहे। लेकिन महकमे के अधिकारियों की सुस्ती संक्रामक रोगों पर भारी पड़ जाएगी।  

सीएमओ डा. आरएन सिंह की माने तो स्वास्थ्य विभाग व ग्राम पंचायतों को कई बार निर्देशित किया गया, लेकिन जनपद की सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। ऐसे लापरवाह अफसर व कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बताया कि जनपद में डेंगू का एक भी मामला सामने नहीं आया है। जिला अस्पताल में डेंगू जांच कीट उपलब्ध है। साथ ही स्पेशल वार्ड भी तैयार रखा गया है। मुगलसराय में भी कई गांवों से भी पानी घटने लगा है लेकिन इसके साथ ही गांवों में बीमारियों की बाढ़ आने वाली है। चिकित्सकों की माने तो बाढ ग्रस्त इलाकों में लोग बुखार के साथ पेट से संबंधित बीमारियों की चपेट में हैं। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने चौबीस मेडिकल टीमों का गठन किया है लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
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पिछले दस दिनों से गंगा के जल स्तर में लगातार बढ़ोत्तरी के साथ ही तटवर्ती इलाकों में बाढ़ आ गई। यही नहीं पहाड़ी क्षेत्र के चंद्रप्रभा बांध से पानी छोड़ेजाने की वजह से उफनाई कर्मनाशा नदी ने तटवर्ती इलाकों में तबाही मचायी। इस तरह कुछ मिलाकर आधा जिला ही बाढ़ की चपेट में आ गया। सौ से अधिक गांवों की स्थिति यह है कि यहां के लोबों को आशियाना छोड़ कर राहत शिविरों की शरण लेनी पड़ी है। जिन गांवों में पानी कुछ कम है वहां भी पेयजल की समस्या खड़ी है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले में बीस स्टेटिक और छह मोबाइल मेडिकल टीम का गठन किया है। इस टीम में डाक्टरों के साथ एक एनएनएम, वार्ड ब्वाय, स्वीपर आदि की व्यवस्था की गई है। दावा किया गया है कि यहां संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए जीवन रक्षक दवाइयों की व्यवसथा की गई है। कुछ जगह दी दवाएं दी गई। मगर अधिकांश्‍ा जगह चौकियों पर डाक्टर मौजूद नहीं थे।
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