दुलहीपुर कर्बला (शकूर का भट्ठा) के पास गिरे मकान के मलबे में दबकर 13
लोगों की मौत का मातम दूसरे दिन सोमवार को भी कस्बे में पसरा दिखा।
कई
घरों में चूल्हे नहीं जले। जैसे किसी को खाने की चाह ही नहीं रह गई। पूरे
गांव में हर तरफ बस हादसे की ही चर्चा होती रही। खासकर इस पर भी लोग बात
करते दिखे कि नया मकान ढहने की घटना जिले में शायद ही पहले कभी हुई हो।
सोमवार
की सुबह से ही जमींदोज मकान के मलबे को देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी।
कई
दलों के नेता एवं समाजसेवी पीड़ित परिवार को संवेदना जताने पहुंचे। आसपास
के लोग यह कहने से नहीं चूक रहे थे कि मकान निर्माण में मानक का ध्यान नहीं
रखा गया।
साथ ही उसी में दो पावरलूम भी लगा दिए गए थे। इसके झटके भी मकान
पर दुष्प्रभाव डालते रहे होंगे। लोगों में इस बात को लेकर भी चर्चा होती
रही कि आखिर इतने बड़े हादसे के पीछे दोषी कौन है? इसी कस्बे में अभी कई
मकान ऐसे हैं जो जर्जर हालत में हैं।
बावजूद इसके उसमें पावरलूम लगाए गए
हैं। उन पर भी ध्यान देने की जरूरत है। लोगों का कहना है कि प्रशासन ऐसे
मकानों को चिह्नित कर तत्काल गिराने का बंदोबस्त करे, अन्यथा रविवार को हुई
घटना की पुनरावृत्ति कभी भी हो सकती है।
उधर राजनीतिक दलों के लोग भी घटना स्थल पर पहुंचकर पीड़ित परिवार को सांत्वना देते रहे।