बाढ़ से निपटने के लिए जिले में 16 चौकियां तथा सात राहत शिविर बनाए गए थे। बाढ़ कम होते ही बाढ़ चौकियों और राहत शिविरों को बंद कर दिया गया। हालांकि इन शिविरों में रहने वाले असुविधाओं से जूझते रहे।
नियामताबाद ब्लाक में जलीलपुर, चौरहट, बहादुरपुर में बाढ़ राहत शिविर बने थे। मंगलवार की शाम चार बजे शिविरों में पहुंचने पर पता चला कि ये बंद हो चुके हैं। जलीलपुर चौकी पर हरिहर और महेन्द्र परिवार के साथ मिले। यहां कोई अधिकारी नहीं मिला। महेन्द्र और हरिहर ने बताया कि जलीलपुर पंचायत भवन, पूर्व माध्यमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र को मिलाकर राहत शिविर बनाया गया। इसमें 50 परिवारों ने शरण ली थी। बताया कि अधिकारियों की सीधी नजर होने की वजह से यहां साफ सफाई, भोजन आदि की अच्छी व्यवस्था रही। तड़वाबीर बाबा मंदिर के समीप झोपड़पट्टी में रहने वाले दोनों बताया कि बुधवार को वे भी अपने घर चले जाएंगे। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय चौरहट केंद्र पर 185 परिवार के सदस्यों ने शरण ली थी, लेकिन बाढ़ कम होने के बाद सभी घर चले गए। वहीं आस पास के लोगों ने बताया कि शिविर में न तो भोजन की अच्छी व्यवस्था रही। न ही अन्य सुविधाएं मिलीं। साफ सफाई भी नियमित नहीं हुई। बहादुर पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बने बाढ़ राहत शिविर में व्यवस्था अच्छी रही। वहीं तहसीलदार मुगलसराय सुनील श्रीवास्तव ने बताया कि तीन राहत शिविरों में कुल छह सौ परिवार के लोगों ने शरण ली थी। बाढ़ कम होने पर सभी अपने घर चले गए।