हिंदू-मुस्लिम साथ निभाते हैं रस्में, मिलकर सुनते हैं मजलिस
हर साल मोहर्रम में यह हिंदू परिवार पूरे श्रद्धा के साथ इमामबाड़ा सजाता है। महिलाएं मोमबत्तियां और अगरबत्तियां जाती हैं हैं। वहीं मुस्लिम समुदाय के सैयद परिवार से जुड़े मौलाना मजलिस पढ़ने आते हैं। पहले सैयद सिब्ते मोहम्मद जाफरी तकरीर करते थे, अब उनके पोते राहिद जाफरी और जाफर मेहंदी इस परंपरा को निभा रहे हैं।
परिवार की सदस्य कलावती देवी ने बताया कि उन्हें हर साल मोहर्रम का बेसब्री से इंतजार रहता है। उनकी बेटियां और रिश्तेदार भी शामिल होकर मन्नतें मांगती हैं। मजलिस के दौरान पटेल परिवार के सभी सदस्य फर्श पर बैठकर तकरीर सुनते हैं, मातम करते हैं और आए हुए लोगों को प्रसाद भी वितरित करते हैं।
नफरत के बीच मोहब्बत का पैगाम
आज जब समाज में धार्मिक विभाजन की रेखाएं और गहरी हो रही हैं, तब दुलहीपुर का यह परिवार एक ऐसे उदाहरण के रूप में सामने आया है, जो यह बताता है कि इंसानियत और आस्था मजहब की दीवारों से कहीं ऊपर होती है।