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Chandauli News: जिला अस्पताल की ओपीडी में 100 से ज्यादा मानसिक रोगी पहुंच रहे

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चंदौली। आज की तेज रफ्तार और तनावपूर्ण जीवनशैली में लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। डिप्रेशन (अवसाद) और एंग्जायटी (चिंता/घबराहट) जैसी स्थितियां तेजी से आम होती जा रही हैं। जिला अस्पताल की मानसिक रोग ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 110 से 150 मरीज परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें से 50 से अधिक एंग्जायटी और 60 से अधिक डिप्रेशन के शिकार हैं।बाबा कीनाराम राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबंध पंडित कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला चिकित्सालय में मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर नितेश सिंह ने बताया कि डिप्रेशन और एंग्जायटी को अक्सर लोग एक ही समझ लेते हैं, जबकि इनके लक्षण और इलाज अलग-अलग होते हैं। सही पहचान और समय पर दवा से मरीज को काफी राहत मिल सकती है।
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डिप्रेशन और एंग्जायटी में फर्क : चिकित्सक डॉक्टर नितेश सिंह ने बताया कि एंग्जायटी (चिंता/घबराहट) मे व्यक्ति भविष्य को लेकर असुरक्षा और डर महसूस करता है।
मुख्य लक्षणों में दिल की धड़कन तेज होना, सांस फूलना, पसीना आना, बेचैनी और तनाव शामिल हैं। यह स्थिति अक्सर किसी परीक्षा, इंटरव्यू या भविष्य की अनिश्चित घटनाओं से जुड़ी होती है। इसे आमतौर पर ‘क्या होगा?’ की भावना से समझा जा सकता है।
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वहीं डिप्रेशन (अवसाद) में लगातार उदासी, निराशा और उन कामों में रुचि खो देने से जुड़ी है जो पहले खुशी देते थे। इसके लक्षणों में नींद की समस्या, भूख कम या ज्यादा लगना, थकान, आत्मग्लानि और जीवन के प्रति निराशा शामिल है। इसे ‘कुछ नहीं हो सकता’ की भावना से समझा जा सकता है।
डॉक्टर नितेश का कहना है कि डिप्रेशन और एंग्जायटी दोनों ही स्थितियां व्यक्ति की जीवन-गुणवत्ता पर गहरा असर डालती हैं। मरीज को समय पर पहचान और इलाज की जरूरत होती है। यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो दवा और परामर्श दोनों जरूरी हैं।
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