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सामान्य से अधिक हुई बारिश, खेती के लिए फायदेमंद

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चंदौली। इस बार जिले में मानसून की अच्छी दस्तक के बाद से लगातार बारिश हो रही है। इससे जिले के किसान जहां गदगद हैं वहीं कृषि विभाग और सिंचाई विभाग भी राहत में है। जिले के किसानों को पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा कारण कि जिले के जलस्रोत से लेकर नदी नाले और तालाबों में पर्यापत पानी हो चुका है। 28 जून तक जिले में लगभग 80-85 एमएम से अधिक बारिश हो चुकी है। जो पिछले साल जून तक हुई 14 एमएम बारिश से कई गुना अधिक है। किसानों के धान की नर्सरी तैयार हो चुकी है। वहीं नवरन इलाके में धान की रोपाई भी शुरु हो गई है। कृषि वैज्ञानिकों का दावा है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक वर्षा हुई है। जो खरीफ के सीजन में किसानों के लिए लाभप्रद साबित होगी।
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कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष जिले में 1.35 लाख हेक्टेयर से अधिक रकबे में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित है। धान की फसल की सिंचाई के लिए पानी की अधिक आवश्यकता होती है। वैसे तो जिले में नहरों का जाल बिछा हुआ है। इसके अलावा फसलों की सिंचाई नलकूप, बंधी, लघुडाल की नहरों और निजी नलकूपों से होती है। लेकिन धान की खेती प्राय: वर्षा के पानी पर आधारित होती है। पिछले वर्ष खरीफ के सीजन में बारिश कम होने पर धान की फसल के उत्पादन पर काफी असर पड़ा था। वहीं किसानों ने भी नहरों का पानी टेल तक पहुंचाने की मांग को लेकर जगह-जगह धरना प्रदर्शन किया। किन्तु इस वर्ष खरीफ के शुरुआती सीजन से ही भगवान इंद्र किसानों पर मेहरबान दिख रहे है। जून माह से ही लगभग रोजाना हल्की और तेज बारिश हो रही है। इससे किसानों के नर्सरी तैयार करने में सहूलियत मिली है। वहीं उन्हें सिंचाई के लिए अधिक लागत खर्च नहीं करना पड़ा है। दूसरी तरफ लगातार हो रही बारिश के चलते नहरों को रोस्टर के हिसाब से संचालित करने में जिला प्रशासन को काफी आसानी हुई है। कृषि वैज्ञानिकों का दावा है कि खरीफ के सीजन में वर्षा अच्छी होने के अनुमान है। इससे खारीफ के उत्पादन का लक्ष्य आसानी से पूरा हो सकेगा।
जिले के किसानों को खरीफ के सीजन में बारिश अधिक होने से धान की रोपाई शुरु कर देना चाहिए। इससे उनके उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी। जून तक 78 एमएम बारिश होनी चाहिए लेकिन इस साल 28 जून तक इससे अधिक बारिश हो चुकी है। आगे भी अच्छी बारिश होने की प्रबल संभावना है। किसान खेतों में हरी खाद का जरुर प्रयोग करें, इससे खेत की उर्वरा शक्ति बढती है। डा. कृष्ण मुरारी पांडेय, मौसम वैज्ञानिक, केवीके।
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