चंदौली। जिले में मनरेगा के कार्यों का शासन ने नए सिरे से सत्यापन कराने का फैसला किया है। सोशल आडिट निदेशालय के सलाहकार एमपी सिंह 24 व 25 सितंबर को जिले में मनरेगा की सोशल आडिट की पड़ताल तो करेंगे ही गांवों में जाकर हकीकत भी परेखेंगे। साथ ही अधिकारियों के साथ बैठक करके जमीनी हकीकत भी जांचेंगे।
मनरेगा के तहत पारर्दिशता लाने को निदेशालय की ओर से वित्तीय वर्ष 2018-19 में कराए गए कार्यों की सोशल आडिट कराई जा रही है। रोस्टर के अनुसार धानापुर, चहनियां व नियामताबाद में ब्लाक कोआर्डिनेटर व रिसोर्स पर्सन आडिट में लगे हैं। इन ब्लाकों में आडिट होने के बाद शहाबगंज विकास खंड की ग्राम पंचायतों में आडिट होनी है। इसमें चार सदस्यीय टीम भी लगाई गई है। ग्राम सभा की खुली बैठक में जिला प्रशासन की ओर से नामित पर्यवेक्षक, ग्राम सचिव, तकनीकी सहायक व ग्राम रोजगार सेवक की उपस्थिति सुनिश्चित की गई है। लेकिन विडंबना कि सरकारी मशीनरी आडिट का खुला मखौल उड़ा रही है। इतना ही नहीं विकास खंड के जिम्मेदार अधिकारी मनरेगा के कार्य काउ शेड और बकरी शेड के नाम पर जिले में बड़े पैमाने पर सरकारी धन ऐसे लोगों को आवंटित किया गया है जो पात्रता की सूची में नहीं आते। हालांकि अधिकारी इस उहापोह में लगे हुए है कि सलाहकार किस गांव में जाएंगे यह अभी तय नहीं है। औचक गांव का चयन किया जाएगा ताकि आडिट की पारर्दिशता की जमीनी हकीकत को परखा जा सके।