श्रीमद्भागवत कथा लोकहितकारी, कल्याणकारी और मानव को सही मार्ग की ओर ले जाती है। यह कथा जीव को पापों से मुक्ति प्रदान कर उसको मोक्ष की ओर ले जाने का सुगम व अतिसरल मार्ग है। कथा के श्रवण मात्र से जीव का परमात्मा से मिलन संभव हो जाता है।
यह बातें त्रिदंडी स्वामी के शिष्य सुंदर राज महाराज ने बृहस्पतिवार को चिरईगांव में चल रहे चतुर्मास यज्ञ के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि कथा औषधीय रूपी अमृत है जो मन और तन दोनों को स्वस्थ कर देती है। मन रूपी बीमारी कथा रूपी औषधि के श्रवण से ठीक हो जाती है। उन्होंने शौनक ऋषि की कथा सुनाते हुए कहा कि वैदिक उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा व संस्कारों को इतना फैलाया कि उन्हें 10 हजार शिष्यों वाले गुरुकुल का कुलपति होने का गौरव मिला। शिष्यों की यह संख्या कई आधुनिक विश्वविद्यालयों की तुलना में भी कहीं ज्यादा थी। कहा कि आज के समय में व्याप्त चिंता, तनाव और व्याकुलता से मुक्ति श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से ही मिल सकती है।