चंदौली। पुरातत्व विभाग ने क्षेत्र के माटीगांव के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में गुप्तकाल या कुषाण काल की सभ्यता होने का अनुमान लगाया है। खुदाई के लिए भूमि पूजन भी हो चुका है। मौसम खराब होने के कारण खुदाई नहीं हो सकी। मौसम साफ रहने पर बुधवार से खुदाई होने की संभावना है। वहीं रोजाना क्षेत्र के सैकड़ों लोग मंदिर परिसर में खुदाई वाले स्थान को देखने के लिए पहुंच रहे है। लोगों में उम्मीद जगी है कि खुदाई के दौरान ऐतिहासिक रहस्य सामने आने के बाद परिसर का विकास धार्मिक और पर्यटन के लिए होगा। इससे अपनी माटी के लिए प्रसिद्ध गांव को एक और उपलब्धि मिल सकती है। गांव के प्राचीन मंदिर परिसर में पुराने पीपल के वृक्ष के नीचे रखी खंडित और समूची मूर्तियां आज भी लोगों के कौतूहल का विषय है। लगभग चालीस वर्ष पहले सर्वे के दौरान माटीगांव आए राज्य पुरातत्व विभाग के तत्कालीन निदेशक डा. राकेश तिवारी ने मंदिर परिसर में रखी मूर्तियों पर मौजूद सिलिकाओं को देखने के बाद संभावना जताई कि दो हजार वर्ष पूर्व में कुषाण अथवा गुप्तकालीन शासकों के समय ऐसी तकनीक का प्रयोग किया जाता रहा है। इसके बाद उन्होंने कुछ अवशेषों को प्रयोगशाला में जांच भी कराई। प्रयोगशाला से सही रिपोर्ट आने के बाद विशेषज्ञों द्वारा लगाए गए अनुमान को बल मिल गया।
इसके बाद जाने-माने पुरातत्वविद और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पूर्व सहायक महानिदेशक वीआर मणि, बीएचयू के प्राचीन इतिहास के विभागाध्यक्ष प्रो. ओएन सिंह ने भी यहां दौरा किया। लोगों की पहल के बाद केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने मंदिर परिसर में छुपे रहस्यों और मानव सभ्यता की बसावट जानने के लिए खुदाई को मंजूरी प्रदान कर दी। शनिवार को बीएचयू के पुरातत्व विभाग के लोगों ने खुदाई से पूर्व भूमि पूजन तथा जमीन को चिह्नित कर चुके है। अब परिसर में खुदाई होने की खबर क्षेत्र में फैल चुकी है। रोजाना सैकड़ों लोग कौतूहल वश माटीगांव पहुंच रहे। लोगों को उम्मीद है कि खुदाई के दौरान दो हजार पूर्व की सभ्यता मिलने पर परिसर धार्मिक और पर्यटन के रुप में विकसित होगा।