पीडीडीयू नगर स्थित एक होटल में आयोजित गोष्ठी में बोलते अतिथि आफताब अहमद अफती। स्रोत:-जागरूक प
- फोटो : शहर में दुकान पर खादी का वस्त्र खरीदते लोग।
पीडीडीयू नगर। तमिल फांडेशन की ओर से नगर के एक होटल में मौलाना आजाद का शिक्षा दर्शन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति विषय पर विचार गोष्ठी हुई। इसमें मुख्य अतिथि बीएचयू के उर्दू डिपार्टमेंट के हेड प्रोफेसर आफताब अहमद अफाकी ने कहा कि मौलाना को कई फील्ड में महारत थी। वे एक महान धार्मिक विद्वान, दार्शनिक, शिक्षाविद, सफल पत्रकार, नामी राजनीतिज्ञ रहे।
पं. नेहरू भी मौलाना आजाद के राजनीतिक नजरिये के कायल थे और उन्हें सबसे एक्सपर्ट पॉलिटिशियन मानते थे। उन्होंने कहा कि मौलाना आजाद का मानना था कि धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ ऐसी शिक्षा भी दी जानी चाहिए। वर्ष 1948 में उन्होंने देश भर के मदरसों और पाठशालाओं के प्रमुखों की अलग-अलग एक, कॉन्फ्रेंस बुलवाई। इसमें उन्होंने दोनों संप्रदायों से कहा कि वे पारंपरिक शिक्षा से आगे बढ़कर पाठ्यक्रम में आधुनिक शिक्षा को जगह दें। बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान, टेक्नोलॉजी, कला, संस्कृति आदि भी सिखाएं, ताकि वे दुनिया के साथ चल सकें। उनका मानना था कि अंग्रेजों की ओर से यूरोपीय शिक्षा प्रणाली ने छात्रों के दिमाग को बंद कर दिया है। उनके दिमाग से मानवीय मूल्यों, सहनशीलता और त्याग की भावना को खाली कर दिया है।
विशेष वक्ता बीएचयू के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. बलराज पांडेय ने कहा कि मौलाना आजाद हमेशा मुसलमानों में राजनीतिक जागरूकता पैदा करने के लिए चिंतित रहते थे। बीएचयू भूगोल के प्रोफेसर सरफराज आलम ने आंकड़ों के हिसाब से मुसलमानों के पढ़ाई में पिछड़ेपन का जिक्र करते हुए कहा कि बेसिक एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में प्रवेश लेने वालों में मुस्लिम बच्चों का हिस्सा मुस्लिम आबादी के हिस्से से ज्यादा है, लेकिन यह धीरे-धीरे कम होता जाता है, यानी वे बीच में ही पढ़ाई छोड़ने लगते हैं। रेलवे के पूर्व वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी दिनेश चंद्र ने अपने भाषण में कहा कि बच्चों को शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश दिलाने के साथ-साथ उनकी पढ़ाई आगे जारी रखना भी बहुत ज़रूरी है। इस मौके पर डॉ. शम्स अजीज , अजहर आलम हाशमी, इरफान अहमद, सोहराब अली अंसारी, शाहजहां बेगम, जहांआरा, इश्तियाक अहमद, डॉ. अजहर सईद उपस्थित रहे। संचालन अफशां रोमानी और शफाअत अली ने संयुक्त रूप से किया। धन्यवाद ज्ञापन इरफान अली ने किया।