चंदौली में चहनियां क्षेत्र के धानापुर पगही निवासी एक व्यक्ति 35 वर्ष बाद अचानक टांडा कला गंगा घाट पर साधु वेश में पहुंच गया। पत्नी के देहांत के बाद वियोग में उसने घर त्याग दिया था। उसे देखने के लिए परिवार वालों के साथ लोगों की भीड़ जुट गई। परिवार वालों ने साधु से अपने घर चलने को कहा लेकिन साधु ने इनकार कर दिया।
उसने कहा कि अब उसका जीवन ईश्वर का हो चुका है। पूरी जिंदगी अब पूजा पाठ में गुजारेगा। इसको लेकर इलाके में चर्चा रही। टांडाकला घाट पर मंगलवार की सुबह सजा धजा एक नाव आकर रुकी। इस पर सवार वृद्ध साधु नित्यक्रिया के बाद पूजा पाठ करने लगा। उसी समय गांव के कुछ लोग अच्छी साज सज्जा देखकर नौका के पास पहुंचे।
उन्होंने साधु से बातचीत शुरू की। बातचीत में पता चला कि साधु धानापुर निवासी पगही गांव का रहने वाला है। वह 35 वर्ष पहले पत्नी के देहांत के बाद उसके वियोग में घर परिवार छोड़ कर चला गया था। उसने जल बिहार करते हुए देश के कोने-कोने में जाकर तीर्थ यात्रा की है। साधु के बहन की शादी टांडा कला गांव में हुई थी।
बहन के बेटे को पता चला कि उसका मामा आया हुआ तो वह भी मिलने पहुंचा। उसने अपने ननिहाल में मामा एवं मामी को यह बात बताई। वर्षों बाद साधु वेश में आए रिश्तेदार की बात सुनकर लोग गदगद हो गए और मिलने पहुंच गए। देखते ही देखते नदी के तट पर लोगों की भीड़ जुट गई। सभी रिश्तेदार साधु को अपने घर चलने को कहने लगे लेकिन साधु ने किसी के साथ जाने से इनकार कर दिया।