धानापुर क्षेत्र के शहीदगांव शिवदासीपुर में हो रहे भगवान भास्कर रामानुज स्वामी की स्मृति में आयोजित महोत्सव श्रीमद् भागवत गीता के महत्व को समझाते हुए युवराज स्वामी महाराज ने भक्तों को जाति और वर्ण व्यवस्था के विषय में जानकारी दी उन्होंने कहा कि जब कोई भक्ति में लीन हो जाता है तो उसके लिए इसका कोई महत्व नहीं होता।
महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का देते हुए अर्जुन को समझाया था कि मनुष्यों के चार वर्णों का सृजन मैने ही किया है। यह कर्म के लिए है। भक्ति के लिए नहीं, चारों वर्णों में रहकर भगवान को प्राप्त किया जा सकता है। कहा कि वर्ण और जाति में उलझकर जीव भ्रमित हो जाता है। जबकि वर्ण व्यवस्था की रचना संसारिक व्यवस्था और मानव जीवन सुचारू रूप से चलाने के लिए हुई है।
स्वामी ने राजा सिवी के त्याग की चर्चा की कहा कि राजा का पहला संतान प्रजा होती है और अगर देश की प्रजा दुखी है तो राजा ही पुर्ण रूप से दोषी होता है। इसलिये सभी मानव जाति को धर्म का अनुशरण करते हुये अपने कर्म पथ पर नित्य निरन्तर अग्रसर होते रहना चाहिये।
भागवत कथा में दीनानाथ पांडेय, घनश्याम मिश्र, झबलू सिंह, सुदर्शन मास्टर, भुटानी सिंह मामा, तिलकधारी तिवारी, भोरिक यादव, रामनरेश गिरी, महेन्द्र पांडेय, छोटेलाल सिह यादव, गिरीश सिंह, गुलाब राम, चन्द्रमा दादा के साथ ही आसपास के ग्रामीणों की काफी ंसंख्या में मौजूदगी रही।