पीडीडीयू रेलवे स्टेशन पर हस्ताक्षर अभियान का शुभारंभ करते डीआरएम उदय सिंह मीना। स्रोत:-जागरूक
धानापुर। कस्बा में चल रही रामलीला में बीते सोमवार की रात को श्रीराम के राजतिलक की घोषणा, कैकेयी का कोपभवन व राम के वनगमन की लीला का मंचन किया गया। श्रीराम के राजतिलक की घोषणा के प्रसंग में दिखाया गया कि राजा दशरथ महर्षि वशिष्ठ से इस संबंध में विचार-विमर्श करते हैं। सब लोग श्रीराम को राजगद्दी सौंपने का समर्थन करते हैं।
श्रीराम के राजतिलक की सूचना मिलने पर कैकेयी की दासी मंथरा चिंतित हो जाती है और भरत के राजतिलक के लिए कुटिल चाल चलती है। मंथरा कैकेयी के पास जाती है और उसे राजा दशरथ, श्रीराम और कौशल्या के खिलाफ भड़काती है। मंथरा कहती है कि श्रीराम के राजा बन जाने पर भरत राम के दास हो जाएगें और कैकेयी कौशल्या की दासी बन जाएगी। पहले तो कैकेयी के ऊपर कोई असर नहीं होता लेकिन धीरे-धीरे वह मंथरा की कुटिल चालों में आ जाती है। मंथरा उससे कोप भवन में जाने और अतीत में राजा दशरथ द्वारा दिए गए दो वरदानों को मांगने को कहती है। कैकेयी सारे आभूषण उतार देती हैं और बालों को खोलकर कोपभवन में चली जाती हैं। राजा दशरथ को सूचना मिलती है तो वे कोप भवन में जाते हैं। वे कैकेयी से कोपभवन में रहने का कारण पूछते है तो कैकेयी उन्हें देवासुर संग्राम की याद दिलाती है और उनके द्वारा दिए गए दो वरदानों को मांगती है। पहले वरदान में भरत को राजगद्दी और दूसरे में श्रीराम को 14 वर्ष के लिए वनवास। यह सुनकर राजा दशरथ व्यथित हो जाते हैं। वे कैकेयी को मनाते हैं लेकिन वह नहीं मानती। जब यह श्रीराम को मालूम होता है तो अपने पिता के पास आते हैं तो कैकेयी उन्हें सारी बात बताती है। यह सुनकर राम कहते हैं कि यह उनके लिए बड़े सौभाग्य की बात है। अनुज को राजगद्दी मिले और वे जंगलों में ऋषि-मुनियों का दर्शन कर कृतार्थ हो जाएंगे। श्रीराम, लक्ष्मण व माता सीता वन गमन की तैयारी करते हैं और मुनिवेश में वन को चलते जाते हैं। यह दृश्य देखकर उपस्थित दर्शक भावुक हो जाते हैं। लीला प्रस्तुत करने वाले कलाकारों में शिवांश, देवांश, अजय, शिवकुमार, अमन, शुभम, मनन, जुगनू पटेल आदि रहे। इस दौरान अध्यक्ष अरविंद मिश्रा, सुजीत जायसवाल, वशिष्ठ दुबे, अच्युतानंद, दया मिश्रा, शुद्धधन आदि रहे।