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यीशु ने लिया जन्म

Fri, 25 Dec 2015 02:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
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प्रेम व उद्धार करने वाले के प्रतीक प्रभु येशु का जन्म गुरुवार की मध्य  रात्रि हुआ। उनके जन्म होते ही मसीही समाज पूरी श्रद्वा से नतमस्तक हो गया  है।
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तालियां बजाकर मैरी क्रिसमस बोलते हुए उनका स्वागत किया। साथ ही एक  दूसरे को गले मिलकर क्रिसमस की बधाई दी। इस अवसर पर जनपद सहित नगर के  विभिन्न चर्चों को सजाया गया।


 झालरों व टिमटिमाती लाइटों से चर्च नहा उठे।  रात भर यूरोपियन कालोनी स्थित बाल येसू कैथोलिक चर्च जगमग रहा। वहीं  क्रिसमस ट्री को आकर्षक ढंग से सजाया। शुक्रवार से चर्च में मेला लगेगा  जहां बच्चे मेले का लुत्फ उठाएंगे।
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प्रेम, आनंद व श्रद्वा के  साथ ईसाई समुदाय ने क्रिसमस के आगमन का जोरदार स्वागत किया। मान्यता है कि  ईसा के जन्म सम्मान में सामूहिक प्रार्थना की जाती है।

ईसा शताब्दी में  ईसाई लोग महाप्रभु ईसा का जन्मदिन मनाते हैं। इसे बड़ा दिन भी कहा जाता है।  प्रभु ने मैरी नामक एक कुंवारी लड़की के पास गैब्रियल नामक दूत भेजा था।  गैब्रियल ने मैरी को बताया कि प्रभु के रूप में बाल येशू उसकी कोख से जन्म  लेंगे। बच्चे का नाम जीसस रखा जाएगा। मैरी की सगाई यूसूफ नामक बढ़ई से हुई  थी।


मैरी ने आधी रात को जीसस को जन्म दिया उसके बाद उन्हें एक नाद में लिटा  दिया। इस प्रकार जीसस का जन्म हुआ। तभी से ईसाई समुदाय क्रिसमस का पर्व  मनाते आ रहे हैं।

क्रिसमस कार्ड भेजकर भी लोगों ने एक दूसरे को बधाई दी।  क्रिसमस पर्व की पूर्व संध्या पर नगर सहित पूरे जनपद में चर्चो को आकर्षक  झालर बत्तियों से सजाया गया था।

चर्च में क्रिसमस ट्री भी सजाया गया था।  नगर में यूरोपियन कालोनी स्थित बाल येशू कैथोलिक चर्च में तारे के आकार के  बने सुंदर झांकी में तब्दील किया गया था।

फादर विपिन सीजे द्वारा रात  ग्यारह बजे मीसा का बलिदान पाठ किया गया। जैसे ही रात के बारह बजे घंड़ी की  सुई टनटनाई ईसाई समुदाय खुशी से झूम उठा। प्रभु के जन्म लेते ही तालियां  बजाकर स्वागत किया गया तथा एक दूसरे को किसींग स्वर में क्रिसमस की बधाई  दी।

इस दौरान क्रिसमस ट्री के पास मोमबत्ती जलाकर प्रभु का आशीर्वाद लिया।  मसीही समुदाय में केक खिलाकर पटाका फोड़कर खुशियां मनाई गई।

सांता क्लॉज ने  भी घूम-घूमकर लोगों को उपहार बांटे। इस अवसर पर भारी संख्या में लोग मौजूद  रहे। इस दौरान फादर विपिन सीजे ने कहा कि गरीबों, असहायों की सेवा करने के  लिए येसू ने जन्म लिया। मसीही समुदाय लोगों की सेवा में सबसे आगे रहता है।  
इनसेट
पूरे भारत में बाल येसू चर्च तीन स्थान बैंगलोर,  नासिक और मुगलसराय में ही हैं। मुगलसराय में स्थित कैथोलिक प्रभु येसू का  चर्च उत्तर प्रदेश के मसीही समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है।

क्रिसमस का पर्व  मनाने के लिए देश के कोने-कोने से इस समुदाय के लोग दो दिन पहले से ही चर्च  में पहुंच जाते हैं। गुरुवार को चर्च में काफी चहल पहल रही। इनके खाने  पीने की व्यवस्था भी की गई है। जिसके लिए इस समुदाय के वालेंटियर्स सेवा  करने में लगे हैं।
इनसेट
चर्च में क्रिसमस पर्व को देखते हुए  अच्छी तरह से सजावट की गई है। जहां गुरुवार से ही मेले जैसा दृश्य दिखाई दे  रहा है। चाट, पकौड़, झूला, गुब्बारा आदि की दूकानें सजी हुई हैं। नए कपड़े  पहनकर इसाई समुदाय के लोग चर्च में आते जाते रहे।
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