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Chandauli News: जटायु ने सीता को रावण से बचाने की कोशिश की थी

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चकिया। मानस प्रेम यज्ञ सेवा समिति द्वारा आयोजित मां काली के पोखरे पर नौ दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ की चौथी निशा को संबोधित करते हुए शुक्रवार की शाम रामायण के मर्मज्ञ की व्याख्या करते हुए पंडित सुखेन त्रिपाठी जी ने कहा कि जटायु ने सीता को रावण से बचाने की कोशिश करते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया। जब रावण सीता का हरण करके ले जा रहा था, तब जटायु ने उसका बहादुरी से मुकाबला किया, लेकिन रावण ने उसे घायल कर दिया।
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मरणासन्न अवस्था में, जटायु ने राम और लक्ष्मण को रावण के बारे में बताया और फिर उनके हाथों से अंतिम संस्कार प्राप्त किया।
उन्होंने कथा सुनाते हुए कहा कि घायल जटायु एक पहाड़ी पर गिर गया, जहां बाद में राम और लक्ष्मण को वे मिले। उन्होंने राम को सीता के हरण के बारे में सारी जानकारी दी और बताया कि रावण दक्षिण की ओर गया है।
जटायु ने राम को यह जानकारी देते हुए अपने प्राण त्याग दिया। भगवान राम ने अपने पिता की तरह उनका अंतिम संस्कार और पिंडदान किया। कथा के दौरान क्षेत्रीय विधायक कैलाश आचार्य ने मंच से रामायण की आरती पूजन किया। इस अवसर पर डॉ. गीता शुक्ला, रामअवध पांडेय, पारस नाथ केसरी, मैनपुर प्रधान ज्ञान प्रकाश गुप्ता ,जगरोपण चौरसिया, रामदुलारे गोंड आदि मौजूद रहे।
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