जान जोखिम में डालकर सड़क पार करते स्कूली बच्चे
- फोटो : Amar Ujala
दुलहीपुर स्थानीय परिषदीय विद्यालय के 110 बच्चे रोजाना सुबह और शाम जान जोखिम में डालकर सिक्स लेन पार कर रहे हैं। सड़क से सटे स्कूल होने के बाद भी निर्माण के दौरान कोई कट, क्रासिंग, चेतावनी बोर्ड या फिर जेब्रा लाइन भी नहीं बनाया गया है। सड़क से रोजाना 1200 ट्रकों सहित 5000 से ज्यादा वाहन चलते हैं। सिक्स लेन बन जाने से इनकी रफ्तार भी तेज हो गई है। ऐसे में कभी भी हादसा हो सकता है। पड़ाव से गोधना तक सिक्स लेन का निर्माण किया जा रहा है।
फिलहाल पड़ाव से दुलहीपुर तक सिक्स लेन का निर्माण पूरा हो गया है और पीडीडीयू नगर में निर्माण चल रहा है। सिक्स लेन से सटे दुलहीपुर में परिषदीय विद्यालय है। जिसमें रोजाना 110 बच्चे पढ़ने आते हैं। दुलहीपुर, करवत, डांडी आदि सभी गांव स्कूल के दूसरे तरफ ही पड़ते हैं। ऐसे में वहां से स्कूल आने वाले बच्चों को सुबह स्कूल आने के समय और शाम को छुट्टी होने के बाद सिक्स लेन को पैदल ही पार करना पड़ता है। 110 में 50 से ज्यादा बच्चे 5-10 साल के हैं, ऐसे में कभी भी हादसा हो सकता है।
नियमत: सड़क के निर्माण के दौरान स्कूल या फिर कोई सार्वजनिक जगह होने पर ओवरब्रिज, क्रासिंग या फिर जेब्रा लाइन ही बना दी जाती है ताकि वाहन चालक वहां वाहन धीमा कर सकें लेकिन सिक्स लेन की निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था की ओर से ऐसा कुछ नहीं बनाया गया है। लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन राजेश कुमार की माने तो सड़क पर जहां भी ऐसे स्कूल आदि हैं उनके लिए जेब्रा लाइन आदि बनाया जाएगा, लेकिन यह काम पूरा होने के बाद होता है। फिलहाल अगर बच्चे सड़क पार कर रहे हैं तो उसके लिए भी कोई न कोई व्यवस्था जल्द बनवा रहे हैं ताकि उनको कोई हानि न हो।