प्रदेश सरकार की तरफ से सभी सरकारी अस्पतालों में सौ से अधिक जांच नि:शुल्क कर दिए जाने के बाद से जिले के अस्पतालों में जांच का दबाव काफी बढ़ गया है। जिससे मरीजों को समय पर रिपोर्ट नहीं मिल पाती। जिससे डाक्टर को दिखाने आए मरीज बैरंग लौट जाते हैं। कुछ ऐसे भी मरीज हैं, जो अस्पताल की जांच पर भरोसा न करके बाहर से ही जांच करा लेना बेहतर समझते हैं। साथ ही कुछ डाक्टर बाहर से ही जांच कराने को प्रेरित करते हैं।
जिले में कुल 13 सरकारी अस्पताल हैं। इसमें से दो संयुक्त जिला चिकित्सालयों में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड व पैथालॉजी में नि:शुल्क जांच की सुविधा उपलब्ध है। इसी तरह सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भोगवारे, धानापुर, सकलडीहा और नौगढ़ मेें एक्सरे व पैथालॉजी की सुविधा है। इसके अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य चहनियां, बरहनी, चंदौली सदर, नियामताबाद, शहाबगंज, चकिया में सिर्फ पैथालॉजी की सुविधा है। वहीं जिला अस्पताल के सूत्रों के अनुसार एक माह में औसतन 12 हजार खून के नमूनों की जांच होती है। वहीं लगभग 1500 मरीजों का अल्ट्रासाउंड व चार हजार मरीजों का एक्सरे किया जाता है। उधर मरीजों की शिकायत है कि जांच के बाद जो रिपोर्ट दो बजे के बाद मिल जानी चाहिए। वह अकसर ही समय पर नहीं मिलती। जिससे दूर से आने वाले को कई बार दौड़ना पड़ता है। जिला अस्पताल में औसतन 100 मरीजों का एक्स-रे और 50 मरीजों का अल्ट्रासाउंड होता है। एक पखवारा पूर्व जिला अस्पताल स्थित एक्सरे विभाग में प्लेट उपलब्ध नहीं थी, जिससे मरीजों को तीन दिनों तक इंतजार करना पड़ा। पीड़ित मरीज नगर निवासी शमशाद व अर्जुन ने बाहर जाकर एक्सरे कराया।