क्षेत्र स्थित एफसीआई गोदाम के पास के रहने वाले आशीष चौहान ने बताया कि लोगों ने 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी। सूचना के बाद वहां पीआरवी से पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। इसके बाद लगभग 20 मिनट तक पुलिसकमी ऑटो रूकवाने में लगे रहे। जब कोई वाहन नहीं मिला तो आशीष एक ई- रिक्शा पर घायल छात्र करन को छह किलोमीटर दूर पीडीडीयू नगर स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय पहुंचा।
आरोप है कि पहले वहां कोई वॉर्ड ब्वाय नहीं मिला। काफी जद्दोजहद के बाद स्ट्रेचर मिली। इसके बाद चिकित्सक ने उपचार शुरू किया। इमरजेंसी रूम में उपचार के दौरान छात्र की मौत हो गई। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई में जुट गई।
पीआरवी से अस्पताल ले जाती पुलिस तो बच सकती थी जान
घायल को टोटो से अस्पताल पहुंचाने वाले आशीष चौहान ने बताया कि हादसे के बाद तुरंत 112 नंबर पर फोन कर पुलिस को बुलाया गया। पीआरवी से पुलिसकर्मी आए भी। लेकिन वे खुद युवक को अस्पताल ले जाने के लिए 20-25 मिनट तक सड़क पर ऑटो रोकवाते रहे। जबकि उनके बाद खुद की स्कॉर्पियो यानी पीआरवी थी। लेकिन वे उसपर नहीं ले गए अगर उसपर अस्पताल ले जाया गया होता तो युवक की जान बच सकती थी। ई-रिक्शा से ले जाने में आधा घंटे लगे उसके बाद भी अस्पताल पहुंचने के बाद युवक जिंदा था। आखिर पुलिस को यह वाहन किसके लिए दिया जाता है जब वह जनता की मदद ही नहीं कर सकती।
अस्पताल में भी जमीन पर पड़ा रहा युवक, पहले स्ट्रेचर देने से किया मना
घायल को टोटो से अस्पताल पहुंचाने वाले आशीष चौहान ने बताया कि महिला चिकित्सालय लाने के बाद भी युवक का काफी देर तक इलाज नहीं हो सका। वह जमीन पर पड़ा तड़पता रहा। पहली बार में स्ट्रेचर मांगने पर स्वास्थ्यकर्मी ने स्ट्रेचर भी नहीं दिया। काफी मशक्कत के बाद स्ट्रेचर मिला तो उसपर रखने के लिए कोई नहीं था। मै बाहर जाकर यातायात व्यवस्था संभाल रहे पुलिसकर्मियों को बुलाया तो उन्होंने युवक को उठाकर स्ट्रेचर पर रखवाया और तब जाकर वह अंदर जा सका।
घटना के बाद पीआरवी मौके पर पहुंची थी, ऑटो को रूकवाने का प्रयास हुआ। पुलिसकर्मियों ने संबंधित लोगों के जरिये ई-रिक्शा से घायल को अस्पताल पहुंचवाया। वही दुर्घटना के बाबत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। -गगनराज सिंह, प्रभारी निरीक्षक, मुगलसराय कोतवाली कोतवाली
सीसी कैमरे की जांच में जानकारी हुई कि शाम को 04 बजकर 08 मिनट पर घायल युवक अस्पताल आया है। इसके बाद 04 बजकर 12 मिनट पर उसका उपचार शुरू हो गया। वहां मौजूद चिकित्सक ने युवक को सीपीआर भी देने का प्रयास किया लेकिन सिर में गंभीर चोट होने के कारण युवक की मौत हो गई। - डॉ. एसके चतुर्वेदी, प्रभारी चिकित्साधिकारी, राजकीय महिला चिकित्सालय