पीडीडीयू नगर। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले बजट को लेकर लोगों में उत्साह दिखा। आर्थिक सुस्ती और बढ़ती बेरोजगारी के बीच वित्त मंत्री से लोग बहुत सी उम्मीद लगाए रहे। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के पिटारे से क्या निकलता है, यह देखने के लिए शनिवार की सुबह से ही लोग टीवी के आगे चिपक गए। जो घरों से बाहर रहे, वे भी मोबाइल पर सोशल साइटों पर बजट पर चर्चा करते रहे। बजट देखने के बाद किसी ने इसे जन कल्याणकारी बताया तो कोई इसे कारपोरेट घराने का बजट बताया।
बजट को लेकर लगातार चर्चा हो रही थी। शनिवार की सुबह 11 बजे बजट पेश होना था लेकिन टेलीविजन पर सुबह से ही बजट पर चर्चा शुरू हो गई। लोग विभिन्न चैनलों पर नजर गड़ा कर बैठ गए। बजट में जैसे जैसे निर्मला सीतारमन आगामी योजनाओं में धन आवंटित करती अथवा नई योजनाओं को घोषित करती कभी आंखों की पुतलियां फैलती तो कभी सिकुड़ जाती। माह के पहले दिन शनिवार को सरकारी कार्यालयों में आधे वक्त ही काम हुआ। ऐसे में बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्यालय नहीं पहुंचे। जो कार्यालय पहुंचे भी मोबाइलों पर सोशल साइटों पर बजट की समीक्षा देखते रहे। वेतनभोगी वर्ग में टैक्स बचत और खर्च को लेकर सांसे अटकती रही। यही हाल महिलाओं, व्यापारियों, छात्रों का भी रहा। पूरे बजट के बाद लोगों की मिली जुली प्रक्रिया रही। किसी ने इसे देश के भविष्य के लिए अच्छा बताया तो कुछ ने इसे निराशाजनक बताया।
कंदवा। बजट को जिले के किसानों ने निराशाजनक बताया है। किसानों का कहना है कि बजट में किसानों ले लिए की गई व्यवस्था ऊंट के मुंह जीरा के समान है। सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कहती है लेकिन इसके लिए ठोस उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
सिकठा गांव निवासी रतन सिंह ने कहा कि अगर सरकार किसानों की भला चाहती है तो बाजार को खुला छोड़ देती। कहा कि अगर सरकार देश को आर्थिक महाशक्ति बनाना चाहती है तो किसानों का आर्थिक रूप से मजबूत बनाना होगा। इसके लिए ठोस उपाय नहीं दिखा। कादिराबाद गांव निवासी किसान ज्ञानचन्द्र सिंह ने कहा कि खेती के समय में पराली पर रोक के चलते किसानों की फसल बर्बाद हो गई। पराली समस्या से निपटने के लिए बजट में किसी तरह के प्रावधान नहीं किए गए। किसान युवा विकास मंच के अरुण सिंह का कहना है कि 2022 तक किसानों की आय दुगुना करने की सरकार की घोषणा केवल हवा हवाई दिख रही है। पूरे बजट में किसी भी योजना का क्रियान्वयन जमीनी स्तर परकैसे होगा, यह नही दिखा रहाहै। घोसवा गांव के किसान नागेन्द्र सिंह ने कहा कि बजट किसान हित में है। सोलर पंप और सोलर ट्रैक्टर के प्रयोग से उत्पादन लागत कम होगा और किसानों को उसका लाभ मिलेगा।
चकिया। आर्थिक मंदी से जूझ रहे देश में प्रस्तुत बजट को मजदूर संगठनों और नेताओं ने अपने अपने चश्मे से देखा है। किसी ने छोटे और मझोले उद्योगों के विकास से मजदूरों का भला होने की बात कही तो किसी ने मजदूूूरों के लिए निराशाजनक बताया।
मजदूर नेता अजय राय ने कहा मोदी सरकार का बजट निराशाजनक है। छोटे तथा मझले उद्योगों को बढ़ाने के लिए नीति का अभाव है। शिक्षा स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं में कम बजट दिया गया है। एलआईसी आईडीबीआई को बेचने का निर्णय घातक है। खेती किसानी रोजगार पैदा करने की बजट में कोई नीति नहीं है। अखिल भारतीय किसान सभा के नेता लालचंद यादव एडवोकेट का कहना है कि आम जनता का बजट नहीं है। बल्कि कारपोरेट घरानों को आगे बढ़ाने में बजट सहायक होगा। बेरोजगारों किसानों के लिए बजट में कुछ नहीं है। कृषि विकास दर को बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। बजट मे मजदुरो के हित की उपेक्षा कि गयी है। बजट पूरी तरह खोखला है।
पीडीडीयू नगर। शिक्षा बजट बढ़ाना अच्छी बात लेकिन नई शिक्षा नीति का इंतजार है। छात्रों ने बजट को शिक्षा के लिए मिला जुला असर वाला बताया। एलबीएस डिग्री कालेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. अनिल यादव ने कहा कि यह बजट मध्यम वर्ग, किसानों, युवाओं और गरीबों के हित वाला है। इसका दूरगामी असर दिखेगा।
छात्र संदीप यादव ने कहा कि बजट में युवाओं व छात्रों में शिक्षा व बेरोजगारी को लेकर काफी उम्मीदें थीं। हालांकि वित्तमंत्री द्वारा शिक्षा का बजट बढ़ाने और नई शिक्षा नीति लाने की घोषणा की है। इससे उत्साह जगा है। बेरोजगारी दूर करने के ठोस उपाय किए जाने की जरूरत थी। प्रभाकर सिंह ने कहा कि वित्त मंत्री की ओर से नई शिक्षा नीति की घोषणा करने के साथ शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए विदेशों से कर्ज और एफडीआई के उपाय पर चर्चा अच्छी पहल है। सरकार को उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए राहत भरे पैकेज व फीस में कमी किए जाने की घोषणा करनी चाहिए थी।
पीडीडीयू नगर। बजट में महिलाओं के लिए बहुत कुछ विशेष नहीं किया गया। महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने के लिए और प्रयास करने की जरूरत थी। महंगाई कम करने के लिए ठोस प्रयास नही किया गया है।
महिला वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन ने बजट पेेश किया लेकिन महिलाओं की सुरक्षा और विकास के लिए बहुत कुछ नही किया गया है। लोगों को आशा थी कि टैक्स स्लैब बढ़ेगा। इससे कुछ बचत होती लेकिन बहुत सुखद स्थिति नहीं दिखी।
साधना अग्रवाल ने कहा कि आज महिलाएं पुझ्रुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा के लिए ठोस उपाय करने की जरूरत है। बावजूद इसके कोई उपाय होता नहीं दिखा। महिलाओं के लिए धन लक्ष्मी योजना की शुरूआत करने की बात कही गई है लेकिन इसका भी असर कितन होगा देखने वली बात होगी। सोनी शर्मा ने कहा कि महिलाओं की सबसे बड़ी समस्या बेताहाशाबढ़ती महंगाई है। थोड़े से पैसे में बजट संभालना मुश्किल है। महंगाई का असर कम करने के ठोस उपाय नहीं किए गए हैं।
पीडीडीयू नगर। केंद्र सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास का नारा देती है लेकिन बजट में अल्पसंख्यकों के लिए कोई विशेष प्रयास होता नहीं दिखा है। आज भी अल्पसंख्यक विकास से बहुत दूर हैं। इनके शिक्षा, रोजगार के लिए अलग सके उपाय होने चाहिए लेकिन अल्पसंख्यकों के विकास के लिए ठोस उपाय नहीं किए गए।
लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज की शिक्षका डॉ. इसरत जहां ने कहा कि अल्पसंख्यक में विशेष कर मुसलमानों में आज भी शिक्षा का अभाव है। रोजगार की कमी से समाज के लोग जूझ रहे हैं। ऐसे में इनके विकास के लिए अलग से बजट दिए जाने चाहिए। हालांकि शिक्षा का बजट बढ़ाया गया है लेकिन विकास के लिए ठोस उपाय किए जाने चाहिए थे। शहबाज आलम खान ने कहा कि आम बजट मे बहुत सी योजनाओं परियोजनाओं के विकास के लिए केन्द्र सरकार ने प्रयास किया है। अल्पसंख्यकों के विकास के बिना ऽसबका साथ सबका विकासऽ संभव नहीं होगा। इस बजट मे अल्पसंख्यकों के विकास हेतु विशेष प्रयास करना चाहिए था।
पीडीडीयू नगर। चार्टेड एकाउंट की नजर में प्रस्तुत बजट देश को विकास के रास्ते पर ले जाएगा। हालांकि तुरंत इसका असर आम लोगों पर नहीं दिखेगा। इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव का असर दिखेगा। वहीं मकान के लिए ऋण पर 1.50 लाख की अतिरिक्त के प्रावधान से आम लोगों को फायदा पहुंचेगा।
चार्टेड एकाउंटेंट अंजनी कुमार ने कहा कि नए टैक्स स्लैब की घोषणा और आईटीआर फाइलिंग को सामान्य बनाने से आम करदाताओं को आसानी होगी। कारपोरेट टैक्स रेट को 25 प्रतिशत से कम कर 15 प्रतिशत किया गया है। इससे उद्यमियों को आसानी होगी। विवाद से विश्वास स्कीम का भी फायदा व्यापारियो को मिलेगा। इसी तरह चार्टेड एकाउंटेंट शम्स तबरेज ने कहा कि भारत में बनने वाले मोबाइल फोन, चीप और मेडिकल डिवाइसेस पर टैक्स छूट देने से भारत में उत्पादन बढ़ेगा और इससे रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। एमएसएमई के टैक्स आडिट सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ कर देना सराहनीय है। जीएसटी रजिस्ट्रेशन को सरलीकरण और फर्जी रजिस्ट्रेशन पर लगाम लगाने के लिए आधार वैरिफिकेशन किए जाने से आसानी होगी।
पीडीडीयू नगर। एक परिवार की नजर से देखे तो बजट मिला जुला असर वाला है। टैक्स छूट का लाभ मिलेगा लेकिन महंगाई कम करने का उपाय न किए जाने से दिक्कत होगी।
नगर के चालीस फीट रोड पटेलनगर निवासी राजेश बंशल ने पूरे परिवार के साथ बजट को देखा। परिवार के सभी सदस्यों ने अलग अलग नजरिए से बजट को परखा। बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए राजेश बंसल ने कहा कि टैक्स स्लैब को बदलने से आसानी होगी लेकिन छूट की सीमा और बढ़ाने की जरूरत थी। वहीं गृहणि कविता बंसल ने कहा कि बजट में महंगाई से बचाव के उपाय नहीं किए गए हैं। इससे बजट से बचने वाले रुपये महंगाई में खत्म हो जाएगा। बीकाम का छात्र मेहुल कुमार ने कहा कि बजट देश के लिए मिला जुला असर वाला होगा। सरकार ने सबके लिए कुछ न कुछ दिया है। 12वीं की छात्रा तन्वी ने कहा कि वाहनों, मोबाइल फोन आदि को महंगा करने से दिक्कत होगी।