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भारत को तिब्बत मुक्ति का समर्थन करना चाहिए : गोविंदाचार्य

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चंदौली के पड़ाव स्थित संग्रहालय में पं.दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते चिंतक ग? - फोटो : CHANDAULI
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पीडीडीयू नगर। भारत हमेशा से सभ्यता मूलक समाज का अनुयायी रहा है। जबकि चीन विस्तारवादी है। अब भारत को तिब्बत की मुक्ति का समर्थन करना चाहिए। कहा कि कैलाश मानसरोवर भारत का अभिन्न अंग है। इसे अंतराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की जरूरत है। ये बातें चिंतक केएन गोविंदाचार्य ने कहीं।
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देवप्रयाग से गंगा सागर तक की यात्रा पर निकले गोविंदाचार्य मंगलवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय की मूर्ति माल्यार्पण करने के बाद नगर में पहुंचे। और पत्रकारों से वार्ता की। उन्होंने कहा कि भारत पूरे विश्व को रहा दिखा सकता है। इसके लिये उसे आगे आना होगा। कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का दर्शन समाज के अंतिम व्यक्ति का हित करने वाला है। निजीकरण के मुद्दे पर कहा कि निजीकरण होना चाहिए लेकिन इसका रोजगार पर असर नहीं होना चाहिए। लाभ में चल रही संस्थाओं का निजीकरण नही होना चाहिए।
परमार कटरा के बाद गोविंदाचार्य रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या एक और दो के पश्चिमी छोर पर पं. दीनदयाल उपाध्याय के मोक्ष स्थल पर पहुंचे और श्रद्धासुमन अर्पित किया। पड़ाव संवाददाता के अनुसार साढ़े 10 बजे गोविंदाचार्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति उपवन पहुंचे। यहां पंडित जी के विशाल मूर्ति के चरणों में शीश नवाया । उन्होंने पंडित जी के जीवन पर आधारित कलाकृतियों को देखा। उन्होंने पंडित जी विचारों को अपनाने का आह्वान किया। कहा इस कोराना काल में सामाजिक दूरी का पालन करते हुए सभी को सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करना चाहिए। इस मौके पर डॉ.अनिल यादव, अनिल गुप्ता उर्फ गुड्डू, अवधेश चौरसिया, विनय वर्मा, प्रशांत श्रीवास्तव, संजय पासवान रहे।
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