अधिवक्ता संशोधन कानून 2025 को लेकर शुक्रवार को दूसरे दिन भी अधिवक्ता मुखर रहे। सदर तहसील में अधिवक्ताओं ने बांह में काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। वहीं डिस्ट्रिक्ट डेमोक्रेटिक बार भवन में अधिवक्ताओं ने पत्र प्रतिनिधियों से बातचीत कर आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी।
बार के पूर्व महामंत्री झन्मेजय सिंह ने कहा कि इस विधेयक के जरिए अधिवक्ता हित व उनकी स्वतंत्रता और उनके मौलिक अधिकारों को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि जरूरत पड़ी तो दिल्ली तक न्याय यात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान झन्मेजय सिंह ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन विधेयक की धारा चार में अलग उपधारा (डी) सरकार की ओर से डाली गई है। इसमें यह कहा गया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया अपने फैसले व कानून या कोई निर्देश खुद से नहीं दे सकता।
अब उसमें केंद्र सरकार की ओर से नामित सदस्य भी रहेंगे। इससे बार काउंसिल ऑफ इंडिया की स्वतंत्रता खत्म हो जाएगी। अध्यक्ष अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि अधिवक्ताओं की ओर से हड़ताल करने पर भी सरकार की ओर से प्रतिबंध लगाने का षडयंत्र किया जा रहा है। इतना ही नहीं किसी अधिवक्ता के ऊपर तीन साल या उससे अधिक सजा के मामले में अधिवक्ता जेल गया तो इसे भी दुर्व्यहार मानते हुए उसकी सदस्यता खत्म करने की बात कही जा रही है।