चंदौली। सौ वर्ष या उससे पुराने पेड़ों को हेरिटेज(धरोहर) का दर्जा मिलेगा। वन विभाग ने जिले में ऐसे 41 पुराने पेड़ों का सर्वे करके चिह्नित किया है। जो लगभग चार पीढ़ी पुराने हैं। इसमें पीपल और बरगद के ज्यादातर वृक्ष शामिल हैं। अब तैयार सूची को जैव विविधता बोर्ड को भेजने की तैयारी चल रही है। इसके बाद पुराने पेड़ों की पड़ताल करने के बाद बोर्ड उन्हें धरोहर का दर्जा देगा।
पेड़ पौधे मानव जीवन के अभिन्न अंग है। इन्ही के भरोसे धरती पर जीवों के रहने के अनुकूल मौसम होता है। ऐसे में अब पुराने पेड़ों को संरक्षित करने की कवायद शुरु हो गई है। भारत सरकार के जैव विविधता बोर्ड के निर्देश पर वन विभाग ने जिले में सर्वे करके 41 ऐसे पेड़ों को चिह्नित किया है जो सौ वर्ष या उससे अधिक पुराने समय हैं। इसमें 24 पेड़ गैर वनभूमि तथा 17 पेड़ वनभूमि में हैं। इन पेड़ों की लंबाई, गोलाई सहित अन्य मानकों का सर्वे करने के बाद वन विभाग ने अनुमान लगाया है कि सभी पेड़ सौ वर्ष या उससे अधिक समय के हैं। अब इन पेड़ों का सर्वे भारत सरकार के जैव विविधता बोर्ड के द्वारा किया जाएगा। सर्वे के दौरान मानकों पर खरा उतरने के बाद पेड़ों को हेरिटेज(धरोहर) का दर्जा दिया जाएगा।
चंदौली। जैव विविधता बोर्ड की ओर से निर्देश प्राप्त होने के बाद सौ वर्ष पुराने पेड़ों का सर्वे करने के लिए पंचायतीराज विभाग को जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन छह माह से अधिक समय गुजरने के बाद भी पंचायतीराज विभाग के अधिकारी पेड़ों का सर्वे कराने में कोई रुचि नहीं ली। ऐसे में बोर्ड की ओर से वन विभाग के अधिकारियों को कई बार रिमाइंडर भी मिला। बाद में वन विभाग ने जिम्मेदारी को संभालते हुए सौ वर्ष या उससे अधिक पुराने 41 पेड़ों का सर्वे करके चिन्हित करने में सफलता प्राप्त की।
जिले में सर्वे के दौरान 41 वृक्ष ऐसे चिन्हित किए गए है जो सौ या उससे अधिक पुराने समय के है। इन पेड़ों को हेरिटेज के रुप में संरक्षित करने के लिए जैव विविधता बोर्ड को सूची भेजा जा रहा है। इसके बाद बोर्ड मानकों के अनुसार सर्वे कराने के बाद उन्हे हेरिटेज का दर्जा देगा। दिनेश सिंह, उप प्रभागीय वनाधिकारी, रामनगर।