स्वास्थ्य सेवाओं को ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाने के लिए सरकार ने जनपद में 284 एएनएम सेंटर खोले हैं। जिसमें से सौ भवनों की हालत ऐसी है कि कब उसकी छत गिर जाए, कहा नहीं जा सकता। खिड़कियां और दरवाजे भी जीर्ण-शीर्ण हो चुके हैं। हर सेंटर पर एक एक एएनएम की तैनाती है।
इन सेंटरों पर एएनएम की तैनाती के साथ ही तमाम चिकित्सकीय सुविधाएं भी सरकार की ओर से दी जाती हैं, जो प्रसव और गर्भवती महिलाओं और नौनिहालों के टीकाकरण से जुड़ी हैं। पर ग्रामीण इलाके की गर्भवती महिलाएं व बच्चे इन सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं, क्योंकि अधिकतर एएनएम सेंटरों पर ताला लटकता रहता है। जबकि प्रत्येक एएनएम सेंटर पर एक एएनएम के साथ एक आशा बहू को भी सहायक के रूप में रखा गया है।
जनपद में दस हजार की आबादी पर एक एएनएम सेंटर बना है। एएनएम सेंटरों पर पानी, बिजली सहित सभी मूलभूत सुविधाएं होने का दावा किया जाता है। एएनएम को सप्ताह में बुधवार व शनिवार को अपने क्षेत्र के गांवों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ नौनिहालों का टीकाकरण एवं सोमवार व गुरुवार को गांवों का भ्रमण कर ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देने के साथ ही विभिन्न रोगों के लक्षण व उनसे बचाव के तरीकों की जानकारी देने का जिम्मा है। वैसे तो सभी एएनएम सेंटर दुर्व्यवस्था का शिकार हैं, लेकिन दूरदराज के ग्रामीण इलाकों के सेंटरों की हकीकत यह है कि वे केवल कागजों पर चल रहे हैं।