मरीजों का इलाज करते डा. संजय कुमार।
मौसमी बीमारियों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रतिदिन औसतन एक हजार मरीज जिला अस्पताल के ओपीडी में इलाज के लिए आते हैं, वहीं 30 मरीज रोजाना भर्ती भी हो रहे हैं। सौ बेड वाले इस अस्पताल के लगभग सभी वार्ड मरीजों से फुल हैं। इसमें ज्यादातर डायरिया, मलेरिया, वायरल फीवर व पीलिया से पीड़ित हैं। डेंगू के मरीजों के लिए जिला अस्पताल में अलग से कक्ष बना है।
जगह-जगह गंदे पानी के जमाव से मच्छर बढ़े हैं। लोग बीमारियों की चपेट में अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसके अतिरिक्त सर्दी, जुकाम, बुखार, टाइफाइड, डायरिया के अलावा हेपेटाइटिस, वायरल आदि के मरीज भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। ओपीडी में मरीजों का दबाव बढ़ने का सीधा असर अस्पताल के पैथालॉजी व एक्सरे रूम में देखने को मिल रहा है। 300 मरीजों के खून के नमूने रोज जांचे जा रहे हैं। वहीं सौ मरीजों का एक्सरे भी हो रहा है।
इसके अतिरिक्त अल्ट्रासाउंड कक्ष में भारी भीड़ होने पर मरीजों को दूसरे दिन बुलाना पड़ रहा है। ओपीडी कक्ष मरीजों से भरा रहता है, वहीं दवा वितरण काउंटर पर भी लोग घंटों जद्दोजहद करते दिखते हैं।
सेहत का रखें इस तरह ख्याल
चंदौली। जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सक डा. संजय कुमार ने बताया तेज बुखार आने पर मरीज को ठंडे पानी की पट्टी लगानी चाहिए। साथ ही चिकित्सक को जरूर दिखाएं। डायरिया होने पर ओआरएस का घोल बनाकर मरीज को पिलाना चाहिए। संक्रामक रोगों से बचने के लिए बाजार में खुले में बिक रहे खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। मलेरिया व डेंगू से बचाव के लिए घर के आसपास गड्ढों में पानी जमा न होने दें और घर में पड़े कूलर का पानी नियमित अंतराल पर बदलते रहें। इसके अतिरिक्त मिट्टी के तेल का छिड़काव करें, ताकि मच्छर न हों। रात में सोते वक्त मच्छरदानी का प्रयोग करें और पानी उबाल कर पीएं।