पीडीडीयू नगर। जिले के 11 परिषदीय विद्यालय ऐसे हैं, जिनके ऊपर हाईटेंशन बिजली के तार लटक रहे हैं। इन विद्यालयों में 800 से ज्यादा छात्र-छात्राएं खतरे के साए में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। इस मौसम में बारिश, तेज हवा और स्पार्किंग के कारण हादसे का खतरा बढ़ जाता है।
बेसिक शिक्षा विभाग और बिजली विभाग ने संयुक्त अभियान चलाकर अधिकांश विद्यालयों को इस खतरे से मुक्त कर दिया है, लेकिन तकनीकी कारणों से अब भी 11 विद्यालयों में हाईटेंशन लाइनें नहीं हट सकी हैं। ऐसे में बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों के मन में हर दिन अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
जिले में कुल 1185 परिषदीय विद्यालय हैं। कुछ वर्ष पहले शिक्षा विभाग ने सर्वे कराया था, जिसमें पता चला था कि 67 विद्यालयों के ऊपर से 11 हजार वोल्ट की लाइनें गुजर रही है। साथ ही कई विद्यालयों के परिसर में ट्रांसफॉर्मर लगे हुए है। कई विद्यालयों में बिजली के पोल खेल मैदान और भवन के बिल्कुल पास खड़े थे। इस रिपोर्ट के बाद शासन से बजट जारी किया गया था। इसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग और विद्युत निगम ने 53 विद्यालयों के ऊपर से हाईटेंशन लाइन हटा दी अथवा दूसरी जगह शिफ्ट कर दी। वहीं, 11 से ट्रांसफॉर्मर हटाए जा चुके हैं। इस कवायद करीब 77 लाख रुपये खर्च किए गए। वहीं, 11 विद्यालयों ऐसे हैं, जिनके ऊपर से हाईटेंशन लाइनें के तार नहीं हटाए गए। इसके कारण इन विद्यालयों में 800 से ज्यादा बच्चे अब भी खतरे के साए में पढ़ाई करते हैं।
बरसात के मौसम में बढ़ जाता है खतरा
बरसात के मौसम में हाईटेंशन लाइन में फॉल्ट, स्पार्किंग और तार टूटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। तेज हवा चलने पर बिजली के तार झूलने लगते हैं। पेड़ों की डालियां तारों से टकराने पर चिंगारियां निकलने लगती हैं। ऐसी स्थिति में विद्यालय परिसर में बड़ा हादसा हो सकता है।
इनसेट-
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खराब मौसम होने बच्चों को खेलने नहीं देते
जिन विद्यालयों के ऊपर से हाईटेंशन लाइन के तार गुजरे हैं, वहां के बच्चों का कहना है कि बारिश और तेज हवा के दौरान बिजली के तारों से आवाज आती है। तेज हवा में तार झूलने लगते हैं, जिससे उन्हें डर लगता है। शिक्षकों का कहना है कि खराब मौसम होने पर बच्चों को मैदान में खेलने नहीं दिया जाता। एहतियात के तौर पर उन्हें कक्षाओं के अंदर ही रोकना पड़ता है।
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एक नजर में आंकड़े
- जिले में कुल परिषदीय विद्यालय : 1185
- हाईटेंशन लाइन वाले चिह्नित विद्यालय : 67
- हाईटेंशन लाइन हटाई गई : 53 विद्यालय
- परिसर से ट्रांसफॉर्मर हटाए गए : 11 विद्यालय
- अब भी खतरे वाले विद्यालय : 11
- कार्य पर खर्च : करीब 77 लाख रुपये
- प्रभावित छात्र-छात्राएं : 800 से ज्यादा
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- बच्चों को स्कूल भेजते समय मन में डर बना रहता है। बरसात में तेज हवा चलती है तो हाईटेंशन तार झूलने लगते हैं। प्रशासन को हादसे का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि जल्द से जल्द तारों को हटाना चाहिए। - संतोष सोनकर, सकलडीहा
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- स्कूल के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजरी है। बारिश के समय डर लगा रहता है कि कोई हादसा न हो जाए। जब दूसरे स्कूलों से तार हटाए जा चुगे हैं तो हमारे स्कूल से भी जल्द हटाना चाहिए। - मोनू चौधरी, सकलडीहा
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सरकार शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन यदि बच्चे ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो इन सुविधाओं का क्या लाभ। बिजली निगम और शिक्षा विभाग को इस समस्या का समाधान करना चाहिए।सीताराम, मझगांवा
बरसात में बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है। तेज हवा चलने पर तार हिलते हैं और आवाज आती है। प्रशासन तत्काल हाईटेंशन लाइन हटवाए, ताकि बच्चे बिना डर के पढ़ाई कर सकें। - गणेश, बोझ
कोट-
ज्यादातर विद्यालयों को हाईटेंशन लाइन के खतरे से मुक्त कर दिया गया है। 11 विद्यालय बचे हैं, जहां से बिजली की मदद से प्रक्रिया पूरी कर तार हटाए जाएंगे। बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- सचिन कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, चंदौली
सकलडीहा के कंपोजिट विद्यालय इटवा के ऊपर से गुजरता बिजली तार। संवाद- फोटो : 1