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हेतमखां का किला

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कमालपुर। सकलडीहा-कमालपुर मार्ग से नौरंगाबाद जाने वाली सड़क पर धानापुर विकास क्षेत्र के हेतमपुर गांव विरासत से भरा पड़ा है। नौरंगाबाद से दो किमी उत्तर स्थित शेरशाह सूरी के जागीरदार हेतमखां ने करीब 600 वर्ष पूर्व तीन किले का निर्माण कराया था जो अब भी विरासत के रूप में मौजूद हैं। जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुके इस किले को अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) पटना इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए संरक्षित कर रहा ।
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बताया जाता है कि शेरशाह सूरी के जागीरदार हेतम खां जब इस क्षेत्र में आया तो उसने यहां तीन कोर्ट बनवाया था। जिसे पूर्वी, पश्चिमी और मध्य कोर्ट के नाम से जाना जाता है। कई वर्षों तक देखरेख के अभाव में इस किले का हिस्सा टूटकर गिरने लगा था। बाद में इस किले पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग पटना की नजर पड़ी। इसके बाद एएसआई ने करीब पांच साल पहले इसे अपने कब्जे में लेकर संरक्षण शुरू कर दिया है। कोर्ट पुरानी अवस्था में बनाए रखने के लिए विभाग लाखौरी ईंट पथवाकर उसे दुरुस्त करा रहा है। विभाग इसे संरक्षित कर युवा पीढ़ी को अवगत कराने और पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार एक बार किसी गांव से बारात भुलैनी कोर्ट देखने के लिए किले में गई थी। वहां आई पूरी बारात ही कोर्ट में गायब हो गई थी। तब से उस किले का नाम भूलैनी कोर्ट हो गया। गांव के नंद कुमार उपाध्याय की माने तो इसमें कई सुरंगे हैं जिससे राजा धानापुर तक जाते थे। वह यह भी बताते हैं कि इसके अंदर कई कमरे हैं जिसमें बड़े-बड़े ताले हैं। उन्होंने बताया कि कमालपुर के लोग रात में आकर खुदाई करते थे लेकिन अंदर दम घुटने लगता था बाहर निकल आते थे। यहां के लोगों की यह भी मान्यता है कि जब हेतमखां कोर्ट को बनवा रहा था तो बार-बार किला गिर जा रहा था। तब राजा ने किसी को कोर्ट में चुनवा दिया। बताते हैं कि वहां रूद्र ब्रह्म बाबा भुलैनी कोर्ट की रक्षा करते हैं। उनके डर से लोग कोर्ट की ईंट तक घर नहीं लाते हैं। अब इस किले को पुरातत्व विभाग पटना अपने संरक्षण में ले लिया है। पुरातत्व विभाग अब इसकी मरम्मत भी करा रहा है।
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हेतमखां के किले को संरक्षित कर रहा पटना एएसआई
किले में भूल गई थी बारात तब से नाम पड़ा भुलैनी कोर्ट 1990 में पटना एएसआई लिया था इसे
हेतमपुर गांव स्थित किले को पटना एएसआई ने 1990 में इसकी देख रेख के लिए ले लिया था। गांव के पूर्व प्रधान राकेश यादव ने बताया कि पुरातत्व विभाग ने जब से अपने अधीन में लिया तब से
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