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Chandauli News: चार गांवों के आरोग्य मंदिरों पर तीन महीने से ताला, छह हजार लोग परेशान

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चहनियां के लक्ष्मणगढ़ में बंद आरोग्य मंदिर। संवाद
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चहनिया। ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस योजना के तहत स्थापित आयुष्मान आरोग्य मंदिर बदहाल हो गए हैं। चहनिया ब्लॉक के बलुआ, घनश्यामपुर, लक्ष्मणगढ़ और मथेला स्थित आरोग्य मंदिर पिछले तीन महीने से बंद हैं। इससे क्षेत्र के छह हजार लोगों को निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ता है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि केंद्रों पर तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) और एएनएम ड्यूटी पर नहीं आते। कभी-कभी एएनएम आती हैं और रजिस्टर में हस्ताक्षर कर लौट जाती हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर सामान्य बीमारियों का उपचार, रक्तचाप, मधुमेह, एनीमिया की जांच, गर्भवती महिलाओं की जांच, बच्चों के टीकाकरण समेत अन्य सुविधाओं का लाभ इन गांवों के लोगों को नहीं मिल पा रहा।

गायब रहने के बाद भी वेतन ले रहे कर्मचारी
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारी अनुपस्थित रहने के बावजूद वेतन ले रहे हैं। जिन केंद्रों को गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बताया जा रहा है, वे उपेक्षा का शिकार हैं। ऐसे में ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की सरकार की मंशा पूरी नहीं हो पा रही।
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आरोग्य मंदिर में मिलती हैं सुविधाएं

- सामान्य बीमारियों का मुफ्त उपचार
- बीपी और शुगर की नियमित जांच
- गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच
- बच्चों का टीकाकरण
- आवश्यक दवाओं का निशुल्क वितरण
- गैर संचारी रोगों की स्क्रीनिंग
स्वास्थ्य परामर्श और रेफरल सुविधा
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ग्रामीणों की जुबानी
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एएनएम मैडम कभी-कभी आती हैं। ताला खोलकर रजिस्टर में हस्ताक्षर करती हैं और फिर लौट जाती हैं। मरीजों की जांच और इलाज करने वाला कोई नहीं रहता। - सवरू पासवान, लक्ष्मणगढ़
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मैं बीपी और शुगर के मरीज हूं। जांच कराने के लिए चहनिया सीएचसी जाना पड़ता है। समय और किराया दोनों खर्च होते हैं। गांव में केंद्र खुला रहता तो राहत मिलती। - राम लच्छन प्रजापति, बलुआ
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आरोग्य मंदिर में ताला बंद रहता है। बीपी-शुगर की जांच तक लोग नहीं करा पाते। मजबूरी में झोलाछाप से इलाज कराना पड़ रहा है। - मनीष उपाध्याय, लक्ष्मणगढ़
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आयुष्मान आरोग्य मंदिर में हमेशा ताला बंद रहता है। गर्भवती महिलाओं और बच्चों को लेकर निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल ले जाते हैं। - मनोज यादव, बलुआ
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कोट
मामले की जांच कराई जाएगी और आरोग्य मंदिरों का नियमित संचालन कराया जाएगा। यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. संदीप कुमार, चिकित्सा प्रभारी

चहनियां के लक्ष्मणगढ़ में बंद आरोग्य मंदिर। संवाद

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