पांच सौ और हजार रुपये के नोट बंद होने से आटो, विक्रम सहित अन्य यात्री वाहन संचालक भी परेशान हैं। स्थति यह है कि मुगलसराय आटो, विक्रम स्टैंड और कार स्टैंड में पहले जैसी चहल पहल नहीं है। स्थिति यह है कि वर्तमान में पचास से साठ प्रतिशत तक कमाई में कमी आ गई है। ग्राहकों से लेन देन को लेकर किचकिच हो रही है सो अलग।
ए प्लस श्रेणी वाले मुगलसराय रेलवे स्टेशन से बडे पैमाने पर यात्रियों का आवागमन होता है। इसकी वजह से यहां से प्रतिदिन दो से ढाई सौ आटो रिक्शा, इतने ही विक्रम और करीब इतने ही कार, बोलेरो, स्कार्पियो सहित अन्य वाहनों का संचालन होता है। आम तौर पर यात्री मुगलसराय से वाराणसी और आस पास के इलाकों के लिए बुक करते हैं। यही नहीं कार सहित अन्य लग्जरी गाड़ियां लंबी दूरी के लिए भी तय होती है। वाहन चलाकर दो से ढाई हजार लोगों की आजीविका चलती है, लेकिन आठ नवंबर को 500 और एक हजार रुपये के नोट बंद होने के बाद वाहन चालकों की आजीविका पर असर पड़ा है। वाहन चालकों की माने तो नोटबंदी के बाद कमाई आधी रह गई है। स्थिति यह है कि रोज ही यात्रियों से किचकिच हो रही है। चालक मनोज कुमार ने बताया कि सवारियां तो खूब आ रही है लेकिन अभी भी वे पांच सौ और हजार के नोट ही देना चाह रहे हैं। इनकार करने पर सवारियां बिदक जा रही है।
कई बार इसको लेकर किचकिच हो जा रही है। मंसूर आलम ने बताया कि वाहन चलाकर प्रतिदिन दो से तीन सौ रुपये बचा लेता था लेकिन आठ के बाद से तेल का खर्चा भी नहीं निकल पा रहा है। कोमल प्रसाद ने कहा कि लगन के समय में वाहन चालकों की अच्छी कमाई होती है लेकिन फुुटकर समस्या ने कमाई में सेंध लगा दी है। स्थिति यह है कि खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। मनोज कुमार यादव ने बताया कि परिवार का खर्च कैसे चलेगा। यह समझ में नहीं आ रहा है। स्थिति कब तक सुधरेगी कहा नहीं जा सकता है।