टांडाकला। क्षेत्र के सोनबरसा गांव के 20 श्रद्धालु प्रयागराज महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए निजी गाड़ी से 28 जनवरी को रात आठ बजे निकले थे। 29 जनवरी को सुबह आठ बजे संगम पर स्नान करने पहुंचे। कुछ लोग स्नान करने लगे, उसी बीच कुछ लोग बिछड़ गए।
संगम पर ही जैसे-तैसे सभी ने स्नान किया, लेकिन रामजतन निषाद स्नान किए बगैर बिछड़ गए। उन्होंने घर से मोबाइल फोन नंबर लिखवाकर जेब में रखा लिया था। जिस पर फोन कर गाड़ी के पास पहुंच गए। रामजतन ने बताया कि मौनी अमावस्या पर महाकुंभ में स्नान नहीं कर पाए, जिसका उन्हें अफसोस है। बाकी जितने श्रद्धालु थे, स्नान करने के बाद सभी बिछड़ गए। उन्होंने बताया कि 29 जनवरी को रात करीब आठ बजे तक राममूरत निषाद एवं घुरहू निषाद की पत्नी को नहीं ढूंढ पाए। घुरहू लोगों से यह बोलकर मेला क्षेत्र में अपनी पत्नी को खोजने चल दिए कि आप लोग गाड़ी लेकर जाइए, हम खोजकर आएंगे। गाड़ी खुलने तक सभी मिल गए, लेकिन राममूरत निषाद नहीं मिले। इसके बाद 30 जनवरी को दोपहर दो बजे फोन आया कि वे प्रयागराज से ट्रेन पकड़ कर आ रहे हैं। इसके बाद परिवार वालों ने राहत की सांस ली।