यहां पूरे देश भर से मरीज रेलकर्मी पहुंचते हैं। रेलवे के अथवा करार किए गए अस्पताल में रेलकर्मियों के इलाज की निशुल्क व्यवस्था होती है। वहां पहुंचने के लिए रेलवे की ओर से रेलकर्मी को मेडिकल पास भी जारी किए जाते हैं लेकिन अस्पताल के पास रहना अत्यधिक खर्चीला होता है। यही हाल घुमने फिरने में भी होता है।
अत्यधिक खर्च होने की वजह से रेलकर्मी परिवार के साथ हिल स्टेशन, धार्मिक स्थलों पर घूमने से परहेज करते हैं। दो दिन पहले हाजीपुर में ईस्ट सेंट्रल रेलवे इंप्लाईज यूनियन ने केंद्रीय कर्मचारी कल्याण निधि समिति की बैठक में होली डे होम की व्यवस्था की मांग उठाई। इस पर जीएम छत्रसाल सिंह ने होली डे सर्वे कराने के लिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रमुख धार्मिक स्थल, हिल स्टेशन और प्रमुख अस्पतालों के आस पास होटलों से करार किया जाएगा। इसके बाद कैडर के हिसाब से कर्मचारी होटलों में रुक सकेंगे। खर्च का भुगतान कर्मचारी कल्याण निधि से किया जाएगा। बैठक में यूनियन के जोनल उपाध्यक्ष अवधेश कुमार गुप्ता, डीएन चौधरी, मुख्य कर्मचारी कल्याण निरीक्षक शैलेष कुमार, वाणिज्य निरीक्षक रितेश राय आदि रहे।
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ईस्ट सेंट्रल रेलवे इंप्लाईज यूनियन की डिमांड को मान कर जीएम ने सर्वे कमेटी का गठन किया है। यह स्वागत योग्य कदम है। कर्मचारी होली डे घूमने और गंभीर बीमारी के इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई, चेन्नई आदि मेट्रो शहरों में जाते हैं। उसे ठहरने में मंहगे होटलों में रहना पड़ता है। ग्रुप डी व सी कर्मचारियों के लिए होटलों में रहना मुश्किल होता था। अब कर्मचारी भी होटलों में रुक सकेंगे। - संतोष कुमार पासवान, केंद्रीय अध्यक्ष, ईस्ट सेंट्रल रेलवे इंप्लाइज यूनियन