पीडीडीयू नगर। रेलवे से सेवानिवृत्त कर्मचारी को प्रतिनियुक्ति देकर तीन माह काम कराने के बाद रेलवे ने कर्मचारी को हटा दिया। उसके देय का भुगतान भी नहीं किया गया। इस मामले में रेलकर्मी ने श्रम विभाग की शरण ली। तीन वर्ष की सुनवाई के बाद लेबर कमिश्नर ने एक माह के भीतर 51 हजार रुपये मुआवजा के साथ कर्मी के बकाए 1.02 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश पीडीडीयू मंडल के मंडल रेल प्रबंधक को दिया है।
नगर निवासी पं. दीनदयाल उपाध्याय मंडल के समाडी में तकनीशियन ग्रेड वन के रूप में तैनात सत्यनरायन प्रसाद 31 दिसंबर 2013 को सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद मंडल रेल प्रबंधक के कहने पर पांच जुुलाई 2018 को फिर से पुर्ननियोजन किया गया।
कार्यालय से जारी पत्र में कहा गया कि उन्हें एक दिसंबर 2019 तक कार्य करना है। इस बीच 12 मार्च 2019 को बिना किसी पूर्व सूचना के सेवा से बैठा दिया गया। यही नहीं एक जनवरी से 11 मार्च तक के कार्य के मानदेय का भुगतान भी नहीं किया गया। तीन माह के मानदेय के रूप में 51 हजार रुपये के भुगतान के लिए कई बार गुहार लगाने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई। इस पर समाजसेवी अमोघपुर निवासी विकास शर्मा ने इसकी शिकायत लेबर कमिश्नर से कर दी। इस मामले में कानपुर में सुनवाई शुरू हुई। लेबर कमिश्नर रामकिशन मीना ने सुनवाई करते हुए 16 सितंबर को आदेश जारी करते हुए मंडल रेल प्रबंधक को कर्मचारी को 51 हजार रुपये बकाया और 51 हजार रुपये मुआवजा सहित कुल 1.02 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है।