गंगा का पानी कम होने के बावजूद बृहस्पतिवार को भी बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां कम नहीं हुई। फसल डूबी हुई है। मकान बाढ़ के पानी से घिरे हैं। आवागमन नहीं हो पा रहा है। बाढ़ राहत चौकियों में प्रभावित लोग शरण लिए हुए हैं। सामान्य तौर पर गंगा का पानी चार सेंटीमीटर प्रतिघंटे कम हो रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बृहस्पतिवार की शाम 5 बजे खतरा बिंदु 71.26 मीटर के करीब 71.33 मीटर पर जलस्तर रहा। इससे सभी की चिंता जस की तस बनी हुई है। चेतवानी बिंदु 70.26 मीटर के नीचे पानी जाने पर ही राहत की बात कही जा सकती है।
अब भी बाढ़ जैसे हालात
टांडाकला। गंगा नदी के जलस्तर में बुधवार सुबह छह बजे से घट रहा है किंतु बाढ़ जैसे हालात अभी भी बरकरार हैं। कई गांव अब भी चारों ओर से पानी से घिरे हुए हैं। हालांकि एसडीएम सकलडीहा कुंदन राज कपूर ने बृहस्पतिवार को लगातार दौरा पर रहे और लोगों की मदद की। उन्होंने बताया कि तहसील क्षेत्र के कुल 82 गांव बाढ़ की चपेट में हैं, जिनमें कई गांवों की आबादी भी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित है।
कुशहा में तहसीलदार और नायब तहसीलदार ने किया निरीक्षण
धीना । थाना क्षेत्र के कुशहा गांव में बृहस्पतिवार को गंगा से 500 मीटर अगहर वीर बहुरिया नदी है। जिसके जलस्तर में तेज़ी से वृद्धि के कारण कुशहा गांव में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। गांव के दो टोले (टेहरे) सलेमपुर कुशहा को जोड़ने वाली मुख्य सड़क जलमग्न हो गई है। जिससे आवागमन पूरी तरह से बाधित है। गांव के दो परिवारों के घरों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। तहसीलदार चंद्रगुप्त सागर और नायब तहसीलदार चित्रसेन कुमार यादव ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया। प्रशासन ने प्राथमिक विद्यालय कुशहा को बाढ़ राहत चौकी स्थापित किया है। यहां खाद्य सामग्री, पीने का पानी, दवाएं तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। बहोरा चंडील, सलेमपुर खुर्द, कुशहा तीनों गांव एक ग्राम पंचायत में आते हैं। सलेमपुर खुर्द स्थित गोशाला के निरीक्षण के दौरान पशुओं के रख-रखाव में भारी लापरवाही पाई गई। इस पर तहसीलदार द्वारा ग्राम प्रधान, खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) तथा पशु चिकित्सक को कड़ी चेतावनी दी गई है। मौके पर ही पशुओं को चारा और पोषण आहार उपलब्ध कराया जाए।
फसल बर्बाद होने से किसानों की चिंता बढ़ी
चहनिया। दौली के उत्तरी क्षेत्र में गंगा नदी की भीषण बाढ़ से किसानों की फसले बर्बाद हो रही है। आपदा में सबसे ज्यादा परेशानी हुई बंटाईदार किसानों को, जो पैसे देकर यह बंटाई पर खेत लेकर खेती कर रहे हैं। बलुआ, महुअर कला, सराय, महुआरी, कांवर ,विशुपुर, रामगढ़, नादी, महमदपुर ,हसनपुर, मुकुंदपुर, शहेपुर,रईया, बड़गांवा, के किसानों ने अपनी व्यथा सुनाई। रईयां गांव के विजय कुशवाहा ने बताया कि उनके दो एकड़ मिर्च 10 बिस्सा बैंगन और एक बीघा बाजरा की फसल डूबने वाली है।
किसान धीरज ने कहा उनका एक एकड़ बोड़ा 15 बिस्सा बैंगन और एक बीघा मिर्च डूब रहा है। नादी के किसान पंकज ने बताया कि दो एकड़ बैंगन और एक एकड़ धान की फसल पूरी तरह से डूब गया है। बलुआ सराय के निलेश मिश्रा के तीन एकड़ धान एक एकड़ रहर 10 बिस्सा सब्जी की खेती नष्ट हो गया । क्षेत्र के ऐसे कई किसानों का फसल बर्बाद हो गया है इन किसानों की सबसे बड़ी समस्या यह है की बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लिए सरकार द्वारा दिया जाने वाला मुआवजा सिर्फ खेत मालिकों के खाते में जाता है । बंटाईदार किसानों को कोई मुआवजा नहीं मिलता। इससे उनके सामने खेत का किराया चुकाने , परिवार का भरण पोषण करने और बच्चों की शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में समस्या हो रही है।