वाराणसी शहर में बंदरों के बढ़ते आतंक और उनके प्रबंधन को लेकर लंबे समय से चली आ रही खींचतान पर अब विराम लग गया है। अब तक शहर में बंदरों को पकड़ने और उनके निस्तारण की जिम्मेदारी नगर निगम की मानी जाती थी लेकिन उत्तर प्रदेश शासन के नए आदेश के बाद अब यह पूरी जिम्मेदारी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को सौंप दी गई है।
शासन से जारी आदेश में कहा गया है कि बंदरों की समस्या से निपटने के लिए वन विभाग को एक महीने के भीतर एक समेकित कार्ययोजना प्रस्तुत करनी होगी। इस योजना में बंदरों को पकड़ने से लेकर उनके पुनर्वास तक की पूरी रूपरेखा होगी।
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प्रभागीय वन अधिकारी स्वाति श्रीवास्तव ने बताया कि 2023 से पहले बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी वन विभाग के पास थी। बाद मे जिम्मेदारी नगर निगम को दी गई।
प्रतिवर्ष बंदरों को पकड़ने पर खर्च होते 80 लाख
प्रति वर्ष काशी में बंदरों को पकड़ने पर लगभग 80 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। रिकॉर्ड के अनुसार अब तक 2000 बंदरों को पकड़कर नौगढ़ के जंगलों में छोड़ा गया है। इसके बावजूद लोगों को बंदरों से राहत नहीं मिल रही है। पिसौर में नए श्वान शेल्टर होम का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। शहर में बंदरों की संख्या 30 हजार से अधिक बताई जा रही है। इनका आतंक मंदिरों और पक्के महाल क्षेत्रों में अधिक है।