पीडीडीयू नगर। प्रदेश सरकार ने जबरन धर्मांतरण कराने पर के विरोध में धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश लागू की है। इसके तहत जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर दस वर्ष की सजा का प्रावधान किया है। इस पर समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है। धर्म गुरु और प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि इससे जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक लगेगी लेकिन इसका इमानदारी से पालन आवश्यक है।
इमाम शम्स आलम ने कहा कि लव जिहाद जैसा कोई शब्द होता ही नहीं है। लव अंग्रेजी शब्द है, हिंदी में इसे प्यार कहते हैं। प्यार के दम पर ही दुनियां कायम है जबकि जेहाद पूरी तरह से अलग है। दोनों को एक साथ मिलाना ही मुर्खता है। धर्म जबरन परिवर्तन कराने की चीज ही नहीं है। यह पूरी तरह राजनीतिक मामला है। फादर विपिन सीजे ने कहा कि यह पूरी तरह राजनीतिक मामला है। इसका धर्म से कोई मतलब नही है। भारतीय संविधान में सभी को अपने इच्छानुसार शादी करने, धर्म को मानने की आजादी है। इसी तरह गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के जनरल सेक्रेटरी सरदार महेन्द्र सिंह ने कहा कि जबरन धर्म परिवर्तन गलत है। इस पर कानून से कुछ हद तक रोक लगेेगी लेकिन जरूरी है कि इसका इमानदारी से पालन हो। किसी को अनावश्यक परेशान अथवा राजनीतिक दुश्मनी निकालने का जरिया यह कानून नहीं बनना चाहिए। संतोष तिवारी ने कहा कि लव जेहाद के नाम पर देेश में लगत हो रहा है लेकिन भारतीय संविधान में इसका हल बताया गया है। नए अध्यादेश को सिर्फ लोगों को बांटने के लिए लागू किया गया है।