पड़ाव के अवधूत भगवान राम घाट पर शव दाह करते लोग। संवाद
पड़ाव। वाराणसी के मालवीय (राजघाट) पुल के मरम्मत कार्य के चलते बंद होने का असर आम जनजीवन के साथ ही अंतिम संस्कार पर भी पड़ रहा है। चंदौली जनपद के पड़ाव स्थित अवधूत भगवान राम घाट पर पहली बार दो दिन में 30 से अधिक शवदाह किए गए। घाट से जुड़े लोगों के अनुसार यह अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है, पहले एक सप्ताह में सिर्फ 2 से 3 शवों का अंतिम संस्कार होता था।
23 दिसंबर की रात 10 बजे मरम्मत कार्य के लिए मालवीय पुल बंद होने से वाहनों का उस पार आवागमन पूरी तरह ठप है। ऐसे में बिहार सहित दूर-दराज के इलाकों से वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर शवदाह के लिए आने वाले लोगों को मजबूरी में इस पार ही अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है।
नतीजतन अवधूत भगवान राम घाट पर असाधारण भीड़ उमड़ रही है और लगातार चिताएं जलती दिखाई दे रही हैं। बिहार से आए अतुल कुमार ने बताया कि राजघाट पुल बंद होने के कारण वे अपने पिता का अंतिम संस्कार मणिकर्णिका घाट पर नहीं कर सके और मजबूरी में पड़ाव स्थित अवधूत भगवान राम घाट पर ही अंतिम संस्कार करना पड़ा। बिहार के चैनपुर निवासी सुदामा निषाद अपनी मां का शव लेकर मणिकर्णिका घाट पहुंचे थे, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए वाहन चालकों द्वारा अत्यधिक किराया मांगे जाने पर उन्होंने यहीं अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। सुदामा निषाद ने बताया कि “जितना किराया मांग रहे थे, उतने में पड़ाव पर ही विधि-विधान से अंतिम संस्कार हो गया।