गंगा का जल स्तर लगातार कम हो रहा है। लेकिन बाढ़ ग्रसित इलाकों के लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं। पानी निकलने के बाद कीचड़ की स्थिति हो गई है। हर तरफ दुर्गंध और गंदगी ही दिख रही है। इससे गांवों में बीमारियों की आशंका बढ़ गई है। बावजूद इसके बाढ़ राहत चौकियों पर कोई व्यवस्था नहीं दिख रही है। पीड़ित गांवों में राहत पहुंचाने में भी प्रशासनिक अमला पीछे है।
सोमवार को गंगा का जल स्तर 69.91 रहा। यह चेतावनी बिंदु से एक मीटर 25 सेमी कम है। पिछले चौबीस घंटों में गंगा का जल स्तर 111 सेमी कम हुआ है। इससे गांवों से पानी निकलने से लोगों को राहत मिली है। कुछ गांवों में तो लोग घरों को लौटने लगे हैं। लेकिन अब गांवों में कीचड़ और दुर्गंध का आलम है। जिले में बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 24 टीमों का गठन किया है, लेकिन अधिकांश चौकियों पर डाक्टर गायब हैं और फार्मासिस्ट दवाइयां दे रहे हैं। गांवों में सबसे अधिक परेशानी पेयजल को लेकर है। कीचड़ और दुर्गंध की वजह से गांवों में फैलने वाली बीमारियों को देखते हुए गांवों की कीटनाशक और ब्लीचिंग पाउडर आदि का छिड़काव आवश्यक है। लेकिन गांवों में अभी तक इसकी पहल नहीं की गई है। इसको लेकर ग्रामीणों में गुस्सा है। जबकि इस संबंध में सीएमओ आर एन सिंह ने बताया कि बाढ़ चिकित्सा शिविरों में लगातार लोगों का इलाज किया जा रहा है। शिविरों का भी निरीक्षण किया जा रहा है। दवाओं का छिड़काव भी शुरू किया गया है।