इस वर्ष भले ही मानसून देर से आया है लेकिन पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर गंगा के जल स्तर पर दिख रहा है। पिछले एक सप्ताह से जल स्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वर्तमान में गंगा खतरे के निशान से 8 मीटर नीचे है लेकिन जिस तरह से गंगा के जल स्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है। उससे जल्द ही बाढ़ की आशंका है।
बाढ़ को देखते हुए जिले में 41 बाढ़ चौकियां बनाई गई है। पंचायत भवन, परिषदीय स्कूलों में बाढ़ चौकी बनाकर यहां पशुओं का चारा, खाने पीने की वस्तुओं के साथ पेजयल, प्रकाश आदि की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। बावजूद इसके अभी प्रशासनिक अधिकारियों का दावा हवा हवाई है। बाढ़ चौकियों पर न तो साफ सफाई हुई है और न ही प्रकाश की व्यवस्था।
बाढ़ से निपटने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसके लिये संबधित अधिकारियों को निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। सभी संबंधित विभागों को जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं और जरूरत पड़ते ही बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी जाएंगी। आकाक्षा सिंह, एसडीएम सकलडीहा
केस-1 चहनिया विकास खंड के सोनबरसा गांव में बाढ़ चौकी बनाई गई है। बावजूद इसके अभी तक यहां बाढ़ चौकी तक लिखा हुआ नहीं है। ग्राम प्रधान राधिका देवी के प्रतिनिधि आनंद सोनकर ने बताया लिस्ट में है। अभी तक यहां कोई व्यवस्था नहीं है।
केस-2 बलुआ में थाने के समीप बाढ़ चौकी बना दी गई है। यहां कर्मचारियों को नियुक्त कर दिया गया लेकिन न तो यहां प्रकाश की व्यवस्था है और न ही यहां अन्य कोई व्यवस्था है।
सकलडीहा तहसील में 12 गांव होते हैं अधिक संवेदनशील
सकलडीहा तहसील के धानापुर और चहनिया विकास खंड में 12 गांव बाढ़ के लिए संवेदनशील हैं। संवेदनशील प्रसाहटा, दिया, गद्दोचक और गंगापुर जैसे गांकों में आबादी और फसल दोनों प्रभावित होती हैं। इसके अतिरिक्त 61 अन्य गांव ऐसे हैं जहां केवल फसलें प्रभावित होती हैं। राहत कार्यों के लिए कुल 200 अधिकारी और कर्मचारी नामित किए गए हैं। इनमें तहसीलदार को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जबकि बीडीओ, एडीओ और नायब तहसीलदार प्रभारी के रूप में कार्य करेंगे। इसके अलावा 42 बड़ी और छोटी नावें भी नामित की गई हैं।