गाजीपुर जिले के करंडा और जमानियां से दो बार विधायक रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कम्युनिस्ट नेता रामसुंदर शास्त्री रविवार को पंचतत्व मेें विलीन हो गए।
शनिवार की रात मुगलसराय के कैलाशपुरी में 96 वर्ष की अवस्था में उनका निधन हो गया था। शव को उनके पैतृक गांव गाजीपुर जिले के नारी पंचदेवारा ले जाय गया जहां लोगों ने उनका अंतिम दर्शन किया।
रविवार को गांव के घाट पर सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। गाजीपुर प्रशासन की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ आनर दिया गया।
रामसुंदर शास्त्री किशोरावस्था में ही स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े थे। कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रेरित शास्त्री जी ने वर्ष1942 में आंकुशपुर रेलवे स्टेशन के समीप ट्रेन से सरकारी खजाने को लूटने का प्रयास किया था।
इसमें वे पकड़े गए तथा अंग्रेजों ने उन्हें पचास बेंत मारने के साथ कारावास की सजा भी सुनाई थी। सरयू पांडेय, झारखंडेय राय, जंगबहादुर, पब्बर राम जैसे कम्युनिस्ट नेताओं के समकालीन रामबहादुर शास्त्री देश को आजादी मिलने के बाद जेल से छूटे।
1962 में वे करंडा से विधायक बने। 1967 में वे जमानियां से विधायक चुने गए। इस बीच प्रदेश की सरकार गिर गई और फिर हुए मध्यावधि चुनाव में वह हार गए।
रामसुंदर शास्त्री दो बेटियों के पिता थे और विधायकी जाने के बाद वे बड़ी बेटी सुमित्रा देवी और दामाद परमानंद सिंह यादव के साथ मुगलसराय के कैलाशपुरी में रहने लगे।
पिछले कुछ दिनों से उनकी तबियत खराब चल रही थी। शनिवार की देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली।