पीडीडीयू नगर। अमृत योजना फेस-2 के तहत जलनिगम की ओर से नगर के पांच हजार घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए 15 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इन पैसों से नगर में पांच स्थानों पर पानी की टंकी, 10 ट्यूबवेल और 74 किलोमीटर पाइपलाइन लगाने का कार्य चार माह पूर्व ही पूरा कर लिया गया है। लेकिन अभी तक पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इसका कारण जलनिगम का बंटवारा है। बंटवारे के बाद नगर की पेयजल की व्यवस्था वाराणसी स्थित गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को दी गई है जिसकी लापरवाही से अभी तक पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी है। नगर के लोग पेयजल के लिए जूझ रहे हैं।
नगरीय इलाकों में पेयजल की आपूर्ति के लिए शासन की ओर से अमृत योजना फेस-1 व फेस-2 के तहत नगर में आठ पानी की टंकिया, ट्यूबवेल व पाइपलाइन की व्यवस्था करनी थी। कार्यदाई संस्था जलनिगम ने फेस-1 के अलावा फेस-2 के सभी कार्य पूरे कर लिए हैं। फेस-1 के तहत आपूर्ति हो रही है पर फेस-2 के तहत चार महीने पूर्व ही नगर में पांच पानी की टंकियां, 10 ट्यूबवेल और 74 किमी पाइपलाइन बिछायी जा चुकी है पर जलनिगम के बंटवारे के कारण पानी की आपूर्ति अधर में लटकी है।
दरअसल, जलनिगम को अब केवल ग्रामीणों क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है। नगरीय क्षेत्र की पेयजल व्यवस्था वाराणसी स्थित गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को सौंप दी गई है। बंटवारे से पूर्व ही जलनिगम ने फेस-2 के तहत होने वाले सभी कार्य पूरे कर लिए थे। पांच हजार घरों में पानी की आपूर्ति होनी थी पर पानी की आपूर्ति के ठीक पहले जलनिगम का बंटवारा कर दिया गया। इसके बाद गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की लापरवाही से पानी की आपूर्ति नहीं की जा सकी है। आलम यह है कि गर्मी शुरू होते ही सुभाष नगर सहित कई वार्डों में भूजल नीचे जाने से पानी के लिए लोग परेशान हैं।