ताराजीवनपुर। गेहूं की बोआई शुरू होते ही डीएपी खाद समितियों से गायब हो गई है। यह स्थिति कई वर्षों से चली आ रही है। कृषि प्रधान जनपद में किसानों को बोआई के समय खाद की किल्लत से जूझना पड़ता है। किसान निजी दुकानों से महंगे दर पर खाद खरीदकर खेती करने को विवश हैं।
कृषि प्रधान जनपद होने के बावजूद यहां हमेशा खाद, बीज, बिजली व पानी समय से उपलब्ध नहीं होने के कारण किसान घाटे का सौदा करने को विवश होता है। कई वर्षों से रबी के फसल की बोआई के समय खाद की कमी के कारण किसानों को लंबी लाइन लगानी पड़ती है। वर्तमान में क्षेत्र की समितियों से डीएपी गायब है। हालांकि पिछले दिनों समितियों पर एक-एक ट्रक खाद भेजी गई थी लेकिन यह किसानों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई।
इस समय क्षेत्र के साधन सहकारी समिति धूसखास, संघति, डिग्घी, महरखा आदि पर खाद उपलब्ध नहीं है। किसान समितियों का चक्कर लगाने को विवश हैं। किसानों का कहना है कि मौसम की बेरुखी के कारण एक तरफ जहां धान की फसल बर्बाद हो रही है वहीं दूसरी तरफ खाद नहीं मिल पा रही है।
जब जरूरत के समय किसानों को समितियों पर खाद नहीं मिलती है। खाद आ भी जाए तो किसानों को लाइन में लगना पड़ता है। वहीं खाद के लिए अंगूठा लगाना मुसीबत भरा है। इस संबंध में डिप्टी आरएमओ अजय कुमार मौर्य ने बताया कि खाद आई थी जिसका किसानों में वितरण करा दिया गया है। शीघ्र ही समितियों पर खाद उपलब्ध करा दी जाएगी।