चंदौली। बिहार में खाद की किल्लत है। जिले के विक्रय केंद्र वाले सौ रुपये की लालच में खाद बिहार वालों को बेच दे रहे हैं। इसे कृषि विभाग तत्काल रोकने की जरुरत है वरना जनपद के किसानों को खाद के लिए जूझना पड़ सकता। वहीं कृषि विभाग का दावा है कि अभियान चलाकर खाद की कालाबाजारी रोकी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसान की शिकायत खाद विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिले में खाद की कीमत 11 सौ रूपये बोरी (50 किलो) है। बिहार वाले जिले की खाद को 12 सौ रुपये में खरीदकर ले जा रहे हैं।
जनपद मेंं इफ्को सेवा केंद्र के साथ ही 83 सहकारी समितियां शामिल हैं। इसके अलावा 200 से अधिक निजी खाद की दुकानें हैं। गेहूं की बोआई शुरू होते ही पड़ोसी राज्य बिहार में खाद की किल्लत हो गई है। वहां के किसान पैसे और समय बचाने के लिए सौ-दौ सौ ज्यादा देकर जिले के खाद विक्रताओं से ले रहे हैं। कृषि विभाग का दावा है कि खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए बिहार राज्य के सेट दुकानों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जनपम में 3500 अधिक मीट्रिक टन डीएपी निजी स्टॉक में है। वहीं, 1000 से अधिक मीट्रिक टन डीएपी सरकारी स्टॉक में है। किसान जय सिंह और मुरहू ने बताया कि जिले में गेहूं की बोवाई एक सप्ताह में शुरू हो जाएगी। इससे पहले प्रशासन को अभियान चलाकर खाद की कालाबाजारी रोकनी चाहिए। खाद की दुकानों पर रेट लिस्ट लगवाना चााहिए।
कोट
जनपद में खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए प्रतिदिन अभियान चलाया जा रहा है। अगर किसी भी दुकानदार की शिकायत मिली तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तत्काल दुकानदार अपने दुकानों के बाहर स्टॉक और रेट बोर्ड लगा दें ताकि किसान भ्रमित न हो। विनोद कुमार यादव, जिला कृषि अधिकारी
राकेश चंद्र यादव