चकिया। दलहनी-तिलहनी फसलों की खेती रबी के सीजन में करने से किसानों की आय बढ़ेगी तथा किसानों की आय दुगुनी करने का सरकार का संकल्प भी सार्थक होगा। यह विचार स्थानीय विकासखंड सभागार में नेशनल मिशन ऑफ एग्रीकल्चर एक्सटेंसन (आत्मा) की ओर से आयोजित कृषि गोष्ठी में कृषि विशेषज्ञों ने व्यक्त किये।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र चंदौली के कृषि वैज्ञानिक डा. समीर पांडेय ने कहा कि रबी सत्र में किसानों को गेहूँ के साथ ही दलहनी-तिलहनी फसलों की खेती का रकबा बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नवीनतम खेती की तकनीकों के जरिये किसान अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते है। उन्होंने कहा कि दलहनी-तिलहनी फसलों के साथ ही गेहूँ की खेती में रासायनिक उर्वरकों के साथ जैविक उर्वरकों का प्रयोग लाभकारी सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि फसलों का एकीकृत पोषण प्रबंधन तथा एकीकृत जीवनाशी प्रबंधन करने से फसलों की उत्पादकता के साथ ही उनकी गुणवत्ता में सुधार आएगा। इस दौरान आत्मा के बृजकुमार, वरिष्ठ प्राविधिक सहायक सुरेश, कृषि सलाहकार गिरीश राय, एबीपी श्यामबदन, अमरनाथ, अजीत, देशराज सिंह, विरेन्द्र पाल, संजीव मौर्य, रामवृक्ष, ओमप्रकाश सिंह, भानूप्रताप सिंह, राजनाथ पटेल, ओमप्रकाश कुशवाहा, जोखन पाल, शम्भूनाथ विश्वकर्मा मौजूद रहे। अध्यक्षता योगाचार्य देशराज सिंह ने की।