मड़िहान तहसील क्षेत्र के मटिहानी गांव में प्रस्तावित चकबंदी को लेकर किसानों का विरोध बृहस्पतिवार को खुलकर सामने आ गया। पंचायत भवन में आयोजित खुली बैठक में बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने हाथ उठाकर चकबंदी का विरोध किया। ग्रामीणों का दावा है कि बड़ी संख्या में किसान चकबंदी के पक्ष में नहीं हैं। बैठक के दौरान किसानों ने बंद करो गुटबंदी, नहीं होगी चकबंदी के नारे भी लगाए।
चकबंदी निदेशालय के निर्देश पर आयोजित बैठक में किसानों ने अपनी आपत्तियां रखते हुए कहा कि चकबंदी से गांव में आपसी विवाद और गुटबंदी बढ़ सकती है। उनका कहना था कि भूमि के पुनर्वितरण में कुछ लोगों को उपजाऊ तो कुछ को कम उपजाऊ जमीन मिलने की संभावना है, जिससे असंतोष और तनाव पैदा होगा। इसी वजह से अधिकांश किसान इस प्रक्रिया को गांव में लागू नहीं होने देना चाहते। बैठक में मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों ने एक स्वर में चकबंदी का विरोध दर्ज कराया और विभागीय अधिकारियों से उनकी राय को शासन तक पहुंचाने की मांग की। किसानों ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में वे संतुष्ट हैं और चकबंदी से लाभ के बजाय नुकसान की आशंका अधिक है। सहायक चकबंदी अधिकारी रामपोश ने बताया कि मटिहानी गांव में करीब दो वर्षों से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। गांव में 1161.0104 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है तथा किसानों की संख्या 1200 से अधिक है। खुली बैठक में लगभग 250 किसानों ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि किसानों की राय और बैठक की कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। बैठक में लेखपाल विजयधर, कानूनगो राजेश तिवारी, ग्राम प्रधान संतोष कुमार मौर्य सहित बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण मौजूद रहे।