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टमाटर और मिर्च की खेती कर मुनाफा कमा रहे किसान

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शिकारगंज। धान के कटोरे में सब्जियों की खेती किसानों को रास आने लगी है। नक्सलवाद के दौर में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की प्रेरणा से किसानों ने सब्जियों की खेती को अपनाया। हरी मिर्च तथा टमाटर की खेती कर किसान गेहूं की खेती की अपेक्षा अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। इसी वजह से लगातार इसका रकबा बढ़ता जा रहा है।
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क्षेत्र के मुजफ्फरपुर, कुंडा हेमैया, पुरानाडीह, बलिया खुर्द, दिरेहु, बैरा, बीकापुर, भीषमपुर, कौड़िहार सहित तमाम गांव में किसानों ने इस वर्ष टमाटर और हरी मिर्च की खेती की है। यह किसानों के लिए लाभदायक सिद्ध हो रही है। किसानों ने भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान सहित तमाम निजी बीज कंपनियों के टमाटर और मिर्च की प्रजातियों को अपनाया है। गेहूं की खेती करने से किसानों को जहां प्रति बीघा 16 से 18 हजार मिलते हैं लेकिन लागत चार से पांच रुपये आती है। जबकि आधा बीघा में टमाटर और मिर्च की खेती कर किसान लगभग 50 हजार तक की आमदनी कर रहे हैं। इससे किसान अर्थव्यवस्था को लाभ हो रहा है। दिरेहूं गांव के किसान रामसुधार मौर्य कहते हैं कि धान गेहूं की परंपरागत खेती की अपेक्षा सब्जियों की खेती में अधिक लाभ है। टमाटर एवं मिर्च की खेती से उन्हें मिल रहा है। मुजफ्फरपुर गांव के चंदन गुप्ता कहते हैं कि पहले से धान गेहूं की खेती करते थे लेकिन टमाटर और मिर्च के साथ अब अन्य सब्जियों की खेती करते हैं। कुंडा हेमैया के निवासी किसान जमुना यादव ने कहा कि टमाटर की खेती के साथ ही अन्य सब्जियों की खेती ऊंची जमीन पर करने से अधिक फायदा है। डोडापुर खालसा निवासी मराछु बनवासी ने कहा कि सब्जियों की खेती में धान गेहूं की खेती से कम लागत में अधिक मुनाफा होता है। टमाटर और मिर्च की खेती के लिए यहां की जलवायु ठीक है।
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