दिव्यांग की सहायता करते राकेश रोशन। दाहिने। संवाद
टांडाकलां। राकेश यादव रौशन ने अपने काम के बदौलत दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। राकेश यादव रौशन का जन्म चंदौली के चहनियां ब्लॉक के मारुफपुर गांव में सामान्य किसान रामअवतार यादव के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में हुआ। पांच वर्ष की अवस्था में ही इन्हें पोलियो हो गया, इससे इनका बायां हाथ और बायां पैर 70 प्रतिशत तक पोलियो ग्रस्त हो गया, लेकिन इन्होंने हार नहीं मानी। उपचार और फिजियोथेरेपी से अपनी दिव्यांगता काफी हद तक ठीक की। बायां हाथ अब ठीक हो चुका है। लेकिन बायां पैर अभी भी दिव्यांग है।
राकेश ने बीएचयू से पढ़ाई पूरी की। संसाधन नहीं होने पर राकेश ने ट्यूशन पढ़ाकर अपनी जरूरतें पूरी कीं। इन्होंने बीएचयू स्नातक और पत्रकारिता एवं जनसंचार में परास्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद कई मीडिया संस्थानों में कार्य किया। पत्रकारिता जगत के अनेक सम्मानों से सम्मानित किए गए।
इनसेट
चुनाव आयोग ने ब्रांड एंबेस्डर (स्वीप आइकॉन) नामित किया
राकेश ने अब पांच हजार से ज्यादा दिव्यागजनों को जीवन की मुख्य धारा से जोड़ चुके हैं। जिला प्रशासन और संस्था रौशन फाउंडेशन के सहयोग से दिव्यांगों के लिए शारीरिक उपकरण जैसे -ट्राई साइकिल, मोटराइज्ड ट्राई साइकिल, कान की मशीन, बैसाखी, यूडीआईडी कार्ड, दिव्यांग प्रमाण पत्र, स्वरोजगार आदि में सहयोग कर चुके हैं। वर्ष 2016 में निर्वाचन आयोग ने इन्हें चंदौली में मतदाताओं को मतदान करने के लिए जागरूक करने की बाबत ब्रांड एंबेस्डर (स्वीप आइकॉन) नामित किया।
इनसेट
विस और लोकसभा चुनावों में दिव्यांगों का कराया रिकॉर्ड मतदान
राकेश के प्रयासों से वर्ष 2017, 2019, 2022 और 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में चंदौली में सामान्य और दिव्यांग मतदाताओं ने रिकॉर्ड मतदान किया। इसके लिए इन्हें चार बार के हाथों पुरस्कृत किया गया। दिव्यांगजनों के हित में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राकेश को दिव्यांगता के क्षेत्र में दिया जाने वाला प्रदेश सरकार का सबसे बड़ा पुरस्कार रोल मॉडल अवॉर्ड प्रदान कर सम्मानित किया। वह आकाशवाणी वाराणसी में प्रदेश के इकलौते दिव्यांग कंपीयर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।