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मुगलसराय की ऐतिहासिक पहचान मिटना पीड़ादायक : रामकिशुन यादव

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पीडीडीयू नगर। पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने कहा कि मुगलसराय की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का धीरे-धीरे समाप्त होना अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के साथ-साथ क्षेत्र की विरासत का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।
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रविवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जन्मस्थली होने के कारण मुगलसराय का नाम पूरे देश में सम्मान के साथ लिया जाता था। यहां का रेलवे यार्ड एशिया के सबसे बड़े रेलवे यार्डों में शुमार रहा है, जिसे अब पीडीडीयू रेलवे यार्ड कर दिया गया है। इसके अलावा काली माता मंदिर, गल्ला मंडी, धर्मशाला और जामा मस्जिद जैसी ऐतिहासिक एवं धार्मिक पहचान रखने वाली जगहें विकास कार्यों के दौरान अपना पुराना स्वरूप और अस्तित्व खो चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि मुगलसराय से काली माई के नाम से चर्चित भक्ति गीत भी जुड़ा हुआ है। वहीं काली माता मंदिर का स्थानांतरण भले ही सुभाष पार्क के पास कर दिया गया हो, लेकिन जीटी रोड के समीप स्थित पुराने मंदिर से लोगों की गहरी आस्था और भावनात्मक जुड़ाव था। शहर में निकलने वाली बारातें और अन्य शुभ यात्राएं वहां रुककर पूजा-अर्चना और आशीर्वाद लेने के बाद ही आगे बढ़ती थीं। वर्तमान में मंदिर का स्वरूप और स्थान पहले जैसा नहीं रहा, जिससे लोगों की भावनाएं प्रभावित हुई हैं।
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पूर्व सांसद ने कहा कि नगर के विकास के साथ-साथ उसकी ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना समय की आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें। उन्होंने पुराने धार्मिक, सामाजिक और ऐतिहासिक स्थलों के स्वरूप में आए बदलाव पर गहरा दुःख व्यक्त किया।
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