चंदौली। शासन की नई आरक्षण नीति से जिले के पंचायत चुनावों की गुणा गणित बदली हुई दिखेगी। क्योंकि वर्ष 1995 से अब तक आरक्षण का लाभ नहीं मिलने वाली 465 ग्राम पंचायतों में इस बार एससी अथवा ओबीसी वर्ग के लोगों के लिए आरक्षित होने की पूरी उम्मीद है। जबकि इससे पूर्व में इन ग्राम पंचायतों में महिला या सामान्य वर्ग के लोग ही प्रतिनिधित्व कर रहे थे। ऐसे में चुनावी गणित लगाने वालों षका समीकरण बिगड़ सकता है। संभावना है कि दो या तीन मार्च को जिला प्रशासन की ओर से आरक्षण सूची का प्रकाशन कर दिया जाएगा।
शासन ने नई आरक्षण नीति के तहत 1995 से 2015 तक सामान्य अथवा अनारक्षित रहे ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत व ग्राम पंचायत सदस्य के पदों पर अनुसूचित व पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को मौका देने का फैसला लिया गया है। मानक के अनुसार जिले में 365 ग्राम पंचायतें अनुसूचित व पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होंगी। इसमें अनुसूचित जाति के लिए 166 पद आरक्षित हो जाएंगे। इसमें 57 पदों पर महिलाएं व 109 पर पुरूषों को चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। इसी प्रकार 199 ग्राम प्रधान पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो सकती है। इसमें 70 महिला और 129 पद पुरुषों के लिए आरक्षित होने की संभावना है।
शासन की गाइडलाइन के बाद जिला प्रशासन ग्राम पंचायतों की रिपोर्ट बना रहा है। 1995 से 2015 तक अनारक्षित रहे ग्राम प्रधान के पदों का इस बार आरक्षण बदलेगा। जिला प्रशासन की ओर से तीन मार्च को आरक्षण सूची का पहला प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद ही पता चलेगा कि कौन-कौन सी ग्राम पंचायतें अनुसूचित व पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हुई। डीपीआरओ ब्रह्मचारी दुबे ने बताया कि दावा और आपत्तियां प्राप्त करने के लिए आठ मार्च तक का समय दिया जाएगा। इनके निस्तारण के बाद 14 मार्च को अंतिम आरक्षण सूची जारी की जाएगी। इसके बाद आरक्षण सूची में बदलाव नहीं होगा।