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रोजगार की तलाश में आठ हजार प्रवासी

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चंदौली। जिले में आठ हजार प्रवासी महानगरों और गैर प्रांतों से लौटकर आए है। जो कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉक डाउन के दौरान रोजगार गवां चुके हैं। ऐसे लोगों को जिले में रोजगार दिलाने के लिए शासन से निर्देश दिया जा चुका है मगर जटिल प्रक्रिया के चलते प्रवासियों को बैंकों से ऋण तथा उद्यम इकाईयों में नौकरी दिलाने में जिम्मेदार बहुत रुचि नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में प्रवासियों के सामने परिवार के भरण पोषण की समस्या खड़ी हो गई है।
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लॉक डाउन के बाद जिले में तकरीबन 20 हजार प्रवासी लौटे थे। वही सेवायोजन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले दिनों शिविर के दौरान 8333 प्रवासियों की काउंसिलिंग कराई गई। इसमें ज्यादातर लोग गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, नई दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पश्चिम बंगाल सहित अन्य प्रांतों से लौटे हैं। प्रवासी सबसे अधिक वस्त्र उद्योग, केमिकल प्लांट, भवन निर्माण, औद्योगिक इकाइयों में काम करते थे। वहीं अहमदाबाद, लुधियाना, सूरत आदि स्थानों से लौटे कामगारों को टेक्सटाइल इंडस्ट्री में काम करने का अच्छा-खासा अनुभव है। ऐसे लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए तथा प्रशिक्षण के लिए एनआरएलएम, सेवायोजन, उद्योग विभाग, श्रम विभाग, कृषि, पशुपालन, मत्स्य विभाग के अफसरों को जिम्मेदारी मिली। वहीं अग्रणी जिला बैंक प्रबंधक को प्रवासियों को रोजगार के लिए बैंकों से ऋण दिलाने का जिम्मा है। परंतु अभी तक केवल दो प्रवासियों को विभिन्न फैक्ट्रियों में रोजगार दिलाया जा सका है। जबकि एमएसएमई (माइक्रो स्माल मीडियम इंटरप्राइजेज) योजना के तहत 248 का चयन किया गया है। जिन्हें ऋण दिलाने की प्रक्रिया चल रही है।
प्रवासियों की काउंसिलिंग का कार्य पूरा कराया गया है। विभिन्न औद्योगिक इकाइयों से संपर्क करके उन्हें रोजगार दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। अभी तक दो सौ लोगों को औद्योगिक इकाईयों में नौकरी मिली है। जल्द ही अन्य प्रवासियों को विभिन्न माध्यम से रोजगार दिलाने का कार्य होगा।
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गौरव मिश्रा, उद्योग उपायुक्त।
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