घरों को साफ-सफाई कर सजाया गया और रोशनी की गई। शाम को विधि विधान से
भगवान गणेश और लक्ष्मी की पूजा अर्चना किया गया। शहर में जमकर आतिशबाजी की
गई।
नियम कानून को धता बताते हुए पूरी रात आतिशबाजी की जाती रही। कई जगहों
पर जुए की बाजी भी खूब लगी।
लंका विजय के बाद राम के घर लौटने पर खुशी
में अयोध्या सजाई गई थी।
इस कथा को याद कर चंदौली के निवासियों ने भी घरोें
और दूकानों को सजाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। खुशी में खूब आतिशबाजी
की गई। सौभाग्य के लिए महालक्ष्मी के स्वागत के लिए घरों की रंगाई-पोताई का
सिलसिला तो हफ्ते भर से चल रहा था। बुधवार की सुबह से ही घरों की साफ सफाई
शुरू हो गई थी।
घरोें के बाहर रंगोली सजाई गई। रंगीन कागजों झालर और
फूल-मालाओं से बंदनवार बनाए गए। नगरीय इलाकों में घरों को घरों को विद्युत
झालर, रंग बिरंगे बल्ब आदि से सजाया गया।
बाजार में मिलने वाली रेडिमेड
रंगोली का भी खूब प्रयोग हुआ। शाम के वक्त शुभ मुहुर्त में लोगों ने प्रथम
पूज्य गणेश और वैभव की देवी लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा अर्चना की गई।
इसके बाद घर के बच्चों ने घरौंदा सजाया और उसमें ग्वालिन, मिट्टी के बर्तन
आदि सजाए। इसके बाद प्रसाद स्वरूप मिठाइयों का आनंद लिया और उपहार बांटे।